ICMR: आईसीएमआर की सलाह- मां का पहला दूध बच्चे की सबसे बड़ी सुरक्षा, छह महीने तक केवल स्तनपान जरूरी
ICMR: आईसीएमआर की सलाह- मां का पहला दूध बच्चे की सबसे बड़ी सुरक्षा, छह महीने तक केवल स्तनपान जरूरी
नई दिल्ली, 5 अगस्त। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू कराने और छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाने पर विशेष जोर दिया है। आईसीएमआर का कहना है कि मां का पहला दूध केवल भोजन नहीं बल्कि नवजात के लिए जीवनभर का सुरक्षा कवच है, जो उसे कई गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, देश में अब भी हर दो में से केवल एक नवजात को जन्म के पहले घंटे के भीतर मां का दूध मिल पाता है। वहीं छह महीने तक केवल स्तनपान कराने वाले बच्चों की संख्या भी अपेक्षा से काफी कम है। यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि चुनौती वैज्ञानिक जानकारी की कमी नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से व्यवहार में लागू करने की है।
आईसीएमआर की ऑनलाइन परिचर्चा में डॉ. राजीव बहल, डॉ. जेपी दाधीच, डॉ. मंजू पुरी और डॉ. रवलीन कौर बक्शी सहित कई विशेषज्ञों ने बताया कि मां का दूध बच्चों को संक्रमण, दस्त, निमोनिया और अन्य संक्रामक रोगों से बचाने के साथ-साथ उनके मस्तिष्क के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा नियमित स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन कैंसर, अंडाशय के कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि प्रसव के तुरंत बाद मां और बच्चे को अलग करना, सी-सेक्शन के मामलों में बढ़ोतरी, परिवार का कम सहयोग और शिशु आहार के व्यावसायिक प्रचार जैसी वजहें स्तनपान में सबसे बड़ी बाधाएं बन रही हैं। उन्होंने गर्भावस्था से ही स्तनपान के प्रति जागरूकता, जन्म के तुरंत बाद त्वचा से त्वचा का संपर्क, पहले घंटे में स्तनपान, कंगारू मदर केयर और अस्पताल से छुट्टी के बाद लगातार परामर्श जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।
आईसीएमआर ने कहा कि यदि स्वास्थ्य व्यवस्था, परिवार और समाज मिलकर पहले से सफल उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करें तो हर नवजात को स्वस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत मिल सकती है
