Swachhata Udyami Yojana: सफाईकर्मी से बने उद्यमी, 15 हजार से 50 हजार रुपये पहुंची कमाई, सरकारी योजना ने बदली साहिबाबाद के सतीश की जिंदगी
नई दिल्ली, 17 अगस्त। सरकारी सहायता और स्वरोजगार के अवसर ने साहिबाबाद के 54 वर्षीय सफाईकर्मी सतीश कुमार की जिंदगी में बड़ा बदलाव किया है। कभी 13 से 15 हजार रुपये महीने की आय पर निर्भर रहने वाले सतीश अब अपनी सीवर सक्शन मशीन के मालिक हैं और इस मशीन के जरिए करीब 50 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रहे हैं। ‘नमस्ते’ योजना के तहत स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें ठेके पर सफाई का काम करने से आगे बढ़कर अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया।
सतीश कुमार को योजना के बारे में गाजियाबाद नगर निगम की ओर से आयोजित जागरूकता शिविर के दौरान जानकारी मिली। शिविर में उन्हें स्वच्छता से जुड़े काम करने वाले लोगों के लिए उपलब्ध सरकारी सहायता और स्वच्छता उद्यमी योजना के बारे में बताया गया। इसके बाद सतीश ने योजना के तहत आवेदन किया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें मशीन खरीदने के लिए वित्तीय सहायता मिली।
सतीश को केनरा बैंक से 5.91 लाख रुपये का ऋण मिला। इसके अलावा राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम की ओर से 3.64 लाख रुपये की पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराई गई। इस तरह उन्हें कुल 9.55 लाख रुपये की वित्तीय मदद मिली, जिसका इस्तेमाल उन्होंने सीवर सक्शन मशीन खरीदने में किया।
मशीन मिलने के बाद सतीश ने सीवर सफाई से जुड़े काम को अपने स्तर पर करना शुरू किया। पहले जहां वह दूसरों के लिए ठेके पर काम करते थे और उनकी मासिक आय सीमित थी, वहीं अब मशीन के मालिक होने के कारण उन्हें अपने काम का दायरा बढ़ाने का अवसर मिला है। सीवर सक्शन मशीन के जरिए वह विभिन्न स्थानों पर सफाई संबंधी काम करते हैं और इससे उनकी मासिक आय करीब 50 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
सतीश के अनुसार मशीन से होने वाली आय में से ईएमआई, ईंधन और रखरखाव जैसे खर्च निकालने के बाद करीब 25 हजार रुपये की बचत हो जाती है। इस तरह सरकारी सहायता से शुरू हुआ उनका स्वरोजगार परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर रहा है।
सतीश ने बताया कि स्वच्छता उद्यमी योजना के माध्यम से उन्हें अपनी मशीन खरीदने और खुद का काम शुरू करने का अवसर मिला। पहले वह दूसरों के लिए काम करके सीमित आय अर्जित करते थे, लेकिन अब उनके पास अपना उपकरण और अपना काम है। इससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ भविष्य को लेकर अधिक भरोसा भी मिला है।
स्वच्छता उद्यमी योजना का उद्देश्य स्वच्छता कार्यों से जुड़े लोगों को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना है। मशीन और आधुनिक उपकरणों के जरिए स्वच्छता संबंधी कार्यों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से करने के साथ लाभार्थियों को अपनी आजीविका का साधन विकसित करने में मदद दी जाती है।
सतीश की कहानी इस बात का उदाहरण है कि यदि जरूरतमंद लोगों को उचित वित्तीय सहायता, जानकारी और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं तो वे केवल रोजगार पाने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि स्वयं उद्यमी बन सकते हैं। योजना से मिली मदद ने उनके लिए आय बढ़ाने के साथ अपने काम पर नियंत्रण और आर्थिक आत्मनिर्भरता का रास्ता भी खोला है।
13-15 हजार रुपये की मासिक आय से करीब 50 हजार रुपये तक पहुंची कमाई ने सतीश और उनके परिवार के लिए आर्थिक परिस्थितियों को बदल दिया है। मशीन की किस्त, ईंधन और रखरखाव का खर्च निकालने के बाद बचने वाली राशि से परिवार की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल रही है।
सरकारी योजनाओं की जानकारी जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए आयोजित जागरूकता शिविरों की भूमिका भी इस मामले में सामने आती है। यदि सतीश को नगर निगम के जागरूकता शिविर के जरिए योजना की जानकारी नहीं मिलती, तो उनके लिए इस तरह की वित्तीय सहायता और स्वरोजगार के अवसर तक पहुंच बनाना मुश्किल हो सकता था। अब उनकी सफलता अन्य स्वच्छता कर्मियों को भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती है।


