Fortis Surgery: एक ही सर्जरी में तीन जानलेवा बीमारियों पर वार, फोर्टिस ओखला में 64 वर्षीय मरीज का जटिल इलाज सफल

Fortis Surgery: एक ही सर्जरी में तीन जानलेवा बीमारियों पर वार, फोर्टिस ओखला में 64 वर्षीय मरीज का जटिल इलाज सफल

नई दिल्ली, 17 अगस्त। महाधमनी में गंभीर क्षति, हार्ट वाल्व में भारी रिसाव और किडनी कैंसर जैसी तीन गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य स्थितियों से जूझ रहे 64 वर्षीय मरीज का फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, ओखला के डॉक्टरों ने जटिल मल्टी-स्पेशियलिटी उपचार के जरिए सफल इलाज किया है। अस्पताल के अनुसार, मरीज का इलाज एक ही अस्पताल प्रवास के दौरान किया गया, जिसमें पहले जटिल ओपन-हार्ट सर्जरी के जरिए क्षतिग्रस्त महाधमनी और हार्ट वाल्व की समस्या का उपचार किया गया और इसके बाद रोबोट-असिस्टेड सर्जरी से किडनी के कैंसरग्रस्त ट्यूमर को निकालकर किडनी के स्वस्थ हिस्से को सुरक्षित रखा गया।

मरीज को शुरुआत में सांस फूलने और मामूली शारीरिक गतिविधि करने पर भी हांफने की शिकायत हो रही थी। चिकित्सकीय जांच के दौरान महाधमनी के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने के साथ एओर्टिक वाल्व में भारी रिसाव का पता चला। जांच में बायीं किडनी में कैंसरग्रस्त ट्यूमर की भी पुष्टि हुई। तीनों स्थितियां गंभीर थीं और प्रत्येक के लिए समय पर उपचार जरूरी था।

डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मरीज को अलग-अलग समय पर कई बड़ी सर्जरी से गुजरने के बजाय किस तरह एक समन्वित उपचार योजना के जरिए सुरक्षित तरीके से सभी गंभीर समस्याओं का इलाज किया जाए। इलाज में देरी होने पर क्षतिग्रस्त महाधमनी के फटने, हृदय की कार्यक्षमता तेजी से कम होने और कैंसर के आगे फैलने का खतरा था। ऐसे में विभिन्न विशेषज्ञ टीमों ने मिलकर मरीज के लिए एक व्यापक उपचार रणनीति तैयार की।

कार्डियक टीम ने जटिल ओपन-हार्ट प्रक्रिया के दौरान ‘फ्रोजन एलिफेंट ट्रंक’ ग्राफ्ट की मदद से क्षतिग्रस्त महाधमनी की मरम्मत की। इसी प्रक्रिया के दौरान एओर्टिक वाल्व को भी रिप्लेस किया गया। इस ऑपरेशन का उद्देश्य मरीज की गंभीर हृदय और महाधमनी संबंधी समस्या को नियंत्रित करना और आगे होने वाली संभावित जटिलताओं के खतरे को कम करना था।

इसके बाद यूरोलॉजी टीम ने रोबोटिक पार्शियल नेफ्रेक्टोमी की। इस प्रक्रिया में बायीं किडनी में मौजूद कैंसरग्रस्त ट्यूमर को हटाया गया और किडनी के स्वस्थ हिस्से को बचाने का प्रयास किया गया। रोबोट-असिस्टेड तकनीक का इस्तेमाल जटिल प्रक्रिया को अधिक सटीक तरीके से पूरा करने के लिए किया गया।

यह उपचार कई विशेषज्ञ टीमों के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण रहा। कार्डियक और यूरोलॉजी विशेषज्ञों ने मरीज की अलग-अलग गंभीर समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उपचार की पूरी प्रक्रिया को एक साथ योजनाबद्ध किया। इस तरह मरीज को तीन गंभीर स्थितियों के लिए अलग-अलग अस्पताल प्रवास और प्रक्रियाओं से बचाने की कोशिश की गई।

डॉ. शिव कुमार चौधरी, डॉ. मिलिंद पदमाकर होते, डॉ. पंकज पंवार और डॉ. विक्रम अग्रवाल के नेतृत्व में यह जटिल उपचार किया गया। प्रक्रिया के बाद मरीज की सांस फूलने की समस्या में सुधार हुआ और हृदय की कार्यक्षमता भी बेहतर हुई। चिकित्सकीय निगरानी और स्वास्थ्य में सुधार के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

अस्पताल के अनुसार, एक ही उपचार क्रम में महाधमनी की गंभीर बीमारी, एओर्टिक वाल्व की समस्या और किडनी कैंसर का सफल उपचार अपनी तरह का पहला मामला बताया गया है। इस मामले में कार्डियक सर्जरी, वाल्व रिप्लेसमेंट और रोबोटिक कैंसर सर्जरी जैसी अलग-अलग विशेषज्ञताओं को एक ही उपचार योजना में शामिल किया गया।

यह जटिल मामला इस बात को भी दर्शाता है कि गंभीर और एक से अधिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के उपचार में विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं के बीच समन्वय कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। समय पर बीमारी की पहचान, जोखिम का आकलन और विशेषज्ञ टीमों की संयुक्त रणनीति के जरिए ऐसे मरीजों के लिए उपचार के विकल्प तैयार किए जा सकते हैं।

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