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North East Welfare: पूर्वोत्तर में बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए बढ़ा योजनाओं का दायरा, ₹63.67 करोड़ के सहायक उपकरण वितरित

North East Welfare: पूर्वोत्तर में बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए बढ़ा योजनाओं का दायरा, ₹63.67 करोड़ के सहायक उपकरण वितरित

नई दिल्ली, 27 जुलाई। केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए स्वास्थ्य, पुनर्वास, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने वाली योजनाओं के विस्तार पर जोर दिया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र के 73,572 वरिष्ठ नागरिकों को 3,57,242 सहायक उपकरण वितरित किए गए। इन उपकरणों की कुल लागत ₹63.67 करोड़ रही।

सरकार के अनुसार बुजुर्गों को उनकी जरूरत के मुताबिक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने का उद्देश्य उनकी दैनिक गतिविधियों को आसान बनाना और उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। इसके साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय, पोषण, स्वास्थ्य और मनोरंजन जैसी सुविधाओं को भी योजनाओं के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है।

अटल वयो अभ्युदय योजना के अंतर्गत संचालित इंटीग्रेटेड प्रोग्राम फॉर सीनियर सिटिजन्स के तहत पिछले पांच वित्तीय वर्षों में अकेले असम में 1.03 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इनमें आश्रय, पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और मनोरंजन से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।

इसके अलावा स्टेट एक्शन प्लान फॉर सीनियर सिटिजन्स के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र में वरिष्ठ नागरिकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम, मोतियाबिंद ऑपरेशन और अन्य कल्याणकारी गतिविधियों को भी समर्थन दिया गया है। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा और बेहतर जीवन जीने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

दिव्यांगजनों के लिए भी केंद्र सरकार ने सहायक उपकरण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया है। एडीआईपी योजना के तहत असम में 71,131 और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में 81,551 लाभार्थियों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इससे दिव्यांगजनों को रोजमर्रा के कामों में अधिक आत्मनिर्भर बनाने और उनकी भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने बताया कि एसआईडीपीए योजना के तहत वर्ष 2022-23 से 10 जुलाई 2026 तक पूर्वोत्तर क्षेत्र में 26 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के लिए ₹1.01 करोड़ से अधिक की सहायता उपलब्ध कराई गई। इनका उद्देश्य दिव्यांगजनों से जुड़े अधिकारों, योजनाओं और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सहायता जारी है। सरकार के अनुसार वर्ष 2025-26 में असम के 545 दिव्यांग विद्यार्थियों को ₹2.01 करोड़ की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इससे विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और उच्च शिक्षा के अवसरों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

बच्चों के शुरुआती उपचार और पुनर्वास के लिए गुवाहाटी और इम्फाल में क्रॉस डिसएबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर भी संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों की शुरुआती जांच, उपचार और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का जोर दिव्यांगता की शुरुआती पहचान और समय पर हस्तक्षेप के जरिए बच्चों के विकास में मदद करने पर है।

मंत्री ने बताया कि एलिम्को की ओर से पूर्वोत्तर क्षेत्र में 11 प्रधानमंत्री दिव्याशा-वयोश्री केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण तथा संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने यह भी कहा है कि आवश्यकता और मांग के आधार पर भविष्य में नए केंद्र स्थापित करने पर विचार किया जाएगा।

केंद्र सरकार के अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों में इन योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को स्वास्थ्य सेवाओं, पुनर्वास, शिक्षा, रोजगार के अवसरों और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना है। सरकार का कहना है कि इन पहलों के जरिए क्षेत्र में समावेशी और समान विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

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