Nuclear Power: थिरु एस.बी. सेल्वाकुमारन ने संभाला मद्रास एटॉमिक पावर स्टेशन के स्टेशन निदेशक का कार्यभार

Nuclear Power: थिरु एस.बी. सेल्वाकुमारन ने संभाला मद्रास एटॉमिक पावर स्टेशन के स्टेशन निदेशक का कार्यभार

नई दिल्ली। न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के अधीन संचालित मद्रास एटॉमिक पावर स्टेशन (एमएपीएस), कल्पक्कम को नया स्टेशन निदेशक मिल गया है। थिरु एस.बी. सेल्वाकुमारन ने आधिकारिक रूप से स्टेशन निदेशक का कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने यह जिम्मेदारी थिरु एम. शेषैया के सेवानिवृत्त होने के बाद ग्रहण की। इससे पहले वह एमएपीएस में मुख्य अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया है।

तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित मद्रास एटॉमिक पावर स्टेशन देश के प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में शामिल है। यह एनपीसीआईएल के अधीन संचालित होता है और यहां 220-220 मेगावाट क्षमता वाली दो प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) इकाइयां संचालित हैं। यह संयंत्र दक्षिण भारत में बिजली उत्पादन के साथ-साथ देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

थिरु एस.बी. सेल्वाकुमारन ने वर्ष 1988 में एनआईटी त्रिची से मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वर्ष 1989 में वह एनपीसीआईएल के पहले इन-प्लांट प्रशिक्षण बैच का हिस्सा बने। पिछले 36 वर्षों से अधिक समय में उन्होंने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में संयंत्रों की कमीशनिंग, संचालन, रखरखाव, आधुनिकीकरण और सुरक्षा प्रबंधन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

उनकी तकनीकी विशेषज्ञता का सबसे बड़ा उदाहरण वर्ष 2002-03 के दौरान एमएपीएस यूनिट-2 में एन-मास कूलेंट चैनल रिप्लेसमेंट परियोजना में निभाई गई अहम भूमिका रही। यह परियोजना संयंत्र की कार्यक्षमता और दीर्घकालिक संचालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इसके अलावा 26 दिसंबर 2004 को आए विनाशकारी हिंद महासागर सुनामी के दौरान भी सेल्वाकुमारन ने संयंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी। सुनामी की लहरों के बावजूद एमएपीएस की दोनों इकाइयों की सुरक्षा बनाए रखने और स्थिति को प्रभावी ढंग से संभालने में उनकी भूमिका को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।

एनपीसीआईएल को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में मद्रास एटॉमिक पावर स्टेशन सुरक्षा मानकों को और मजबूत करेगा, आधुनिक तकनीकों को अपनाएगा तथा सुरक्षित और विश्वसनीय परमाणु ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा। उनके लंबे अनुभव और तकनीकी दक्षता से संयंत्र के संचालन, रखरखाव और भविष्य की परियोजनाओं को भी नई गति मिलने की संभावना है।

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