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Noida police industrial Cell: नोएडा में पुलिस इंडस्ट्रियल सेल का गठन, DCP और ACP स्तर के अधिकारी होंगे तैनात, 4 लाख श्रमिकों को मिलेगा लाभ, शासन को भेजा गया प्रस्ताव

Noida police industrial Cell: नोएडा में पुलिस इंडस्ट्रियल सेल का गठन, DCP और ACP स्तर के अधिकारी होंगे तैनात, 4 लाख श्रमिकों को मिलेगा लाभ, शासन को भेजा गया प्रस्ताव

नोएडा में औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों और प्रबंधन के बीच बढ़ते विवाद और हालिया हिंसक आंदोलनों के बाद पुलिस प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। गौतमबुद्ध नगर में पुलिस इंडस्ट्रियल सेल का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य श्रमिकों और कारोबारियों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है।

इस नई व्यवस्था के तहत एक पुलिस उपायुक्त (DCP) इंडस्ट्रियल का पद बनाया गया है, जिसके अधीन एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), तीन निरीक्षक और अलग-अलग रैंक के करीब 25 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी कार्य करेंगे। इस सेल का सीयूजी नंबर 8595902508 भी जारी किया गया है, जिससे सीधे संपर्क किया जा सकेगा।

प्रशासन के अनुसार, इस प्रस्ताव को विस्तृत रूप से तैयार कर तीन दिन के भीतर पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश लखनऊ और गृह विभाग को भेजा जाएगा। इसके साथ ही अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था की ओर से एक विस्तृत एसओपी (Standard Operating Procedure) भी तैयार की जा रही है, जिसे जल्द लागू किया जाएगा।

यह इंडस्ट्रियल सेल तत्काल प्रभाव से काम करना शुरू कर चुकी है और इसका मुख्य फोकस औद्योगिक विवादों को रोकना, श्रमिकों की शिकायतों का निवारण करना और कानून व्यवस्था को मजबूत करना होगा।

नोएडा पुलिस के मुताबिक, जिले में लगभग 15,000 रजिस्टर्ड औद्योगिक इकाइयां हैं, जिनमें लघु, मध्यम, बड़े और मल्टीनेशनल उद्योग शामिल हैं। इन इकाइयों में करीब 4 लाख श्रमिक कार्यरत हैं।

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब श्रमिक सीधे पुलिस अधिकारियों से संवाद कर सकेंगे और उनकी शिकायतों का समय पर समाधान किया जाएगा। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में तनाव और विवाद की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर एक प्रमुख औद्योगिक हब है, जहां लगातार संवाद और समन्वय की आवश्यकता रहती है। नई इंडस्ट्रियल सेल श्रमिक संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का काम करेगी।

सरकार और पुलिस का मानना है कि इस कदम से न केवल श्रमिकों को राहत मिलेगी, बल्कि औद्योगिक माहौल भी अधिक सुरक्षित और स्थिर बनेगा।

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