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Noida: लोकमंच संचालक महेश सक्सेना का फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन दौरा, निशुल्क दवा बैंक को मिली बड़ी सहायता

Noida: लोकमंच संचालक महेश सक्सेना का फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन दौरा, निशुल्क दवा बैंक को मिली बड़ी सहायता

रिपोर्ट: अजीत कुमार

नोएडा शहर की अग्रणी सामाजिक संस्था लोकमंच के संचालक महेश सक्सेना ने सेक्टर-70 स्थित फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन का सौहार्दपूर्ण दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने फाउंडेशन में उपचार और पुनर्वास प्राप्त कर रहे बच्चों से मुलाकात की, उनसे संवाद किया और उनके स्वास्थ्य व प्रगति की जानकारी ली। महेश सक्सेना ने फाउंडेशन के स्टाफ द्वारा किए जा रहे कार्यों की खुले दिल से सराहना करते हुए इसे समाज के लिए अत्यंत सराहनीय प्रयास बताया।

इस दौरान फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन की ओर से नोएडा लोकमंच द्वारा संचालित निशुल्क दवा बैंक के लिए दवाइयां भेंट की गईं, ताकि जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को समय पर उपचार मिल सके। इन दवाइयों का वितरण लोकमंच के माध्यम से जरूरतमंदों तक किया जाएगा, जिससे वे बिना किसी आर्थिक बोझ के इलाज करा सकें।

कार्यक्रम में फाउंडेशन की निदेशक डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव और संचालक डॉ. महिपाल सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके साथ ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुष्मिता भाटी, प्रशासन प्रमुख कृष्णा यादव और फिजियोथेरेपिस्ट अभिनव प्रताप सिंह ने बच्चों से अतिथि की मुलाकात करवाई और फाउंडेशन की उपचार, पुनर्वास और देखभाल से जुड़ी सेवाओं की विस्तृत जानकारी साझा की। विशेष शिक्षिका इलिका रावत, सेंटर मैनेजर सुरभि जैन और सोशल मीडिया मैनेजर सौम्या सोनी की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।

फाउंडेशन टीम ने इस सहयोग को सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया और कहा कि ऐसे प्रयासों से समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्ग तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सकती है। टीम का मानना है कि सामूहिक सहयोग से ही समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।

इस मौके पर महेश सक्सेना ने फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए भविष्य में भी हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि समाज के हर सक्षम व्यक्ति और संस्था को इस तरह की पहलों से जुड़ना चाहिए, ताकि जरूरतमंदों को बेहतर जीवन मिल सके।

फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के संचालक डॉ. महिपाल सिंह ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि कई बार घर में किसी मरीज के ठीक हो जाने के बाद बची हुई दवाइयों को कूड़े में फेंक दिया जाता है, जबकि दूसरी ओर कई गरीब लोग डॉक्टर की फीस और दवाइयों का खर्च उठाने में असमर्थ होने के कारण इलाज नहीं करा पाते। उन्होंने कहा कि घर में पड़ी अतिरिक्त दवाइयां अगर सही जगह पहुंच जाएं, तो किसी जरूरतमंद के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती हैं।

डॉ. महिपाल सिंह ने बताया कि इसी सोच के साथ नोएडा की संस्था लोकमंच ने निशुल्क दवा बैंक की शुरुआत की थी, जिससे आज हजारों जरूरतमंद लोग लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि इस पुण्य कार्य में आगे आएं, लोकमंच की इस पहल का सहयोग करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति दवाइयों के अभाव में इलाज से वंचित न रहे।

 

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