Engineer Death Case: इंजीनियर युवराज की मौत पर NGT सख्त, पांच विभागों को नोटिस

Engineer Death Case: इंजीनियर युवराज की मौत पर NGT सख्त, पांच विभागों को नोटिस

नोएडा में वॉटरलॉगिंग के कारण सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्टों के आधार पर एनजीटी ने इस मामले को पर्यावरण संरक्षण कानून के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा मानते हुए नोएडा अथॉरिटी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग, पर्यावरण विभाग और गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट सहित पांच जिम्मेदार विभागों को नोटिस जारी किया है। सभी विभागों को अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं।

यह मामला ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 का है, जहां एक ट्रेंच पिछले कई वर्षों से स्थायी तालाब में तब्दील हो चुकी है। इसी जलभराव वाले इलाके में कोहरे के कारण रास्ता भटकने के बाद इंजीनियर युवराज मेहता अपनी कार सहित गहरी पानी भरी खाई में गिर गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई। एनजीटी की पीठ ने सुनवाई के दौरान माना कि यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के उल्लंघन की ओर साफ इशारा करता है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने कहा कि वर्ष 2015 में बनाई गई स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट योजना को अब तक लागू न किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। जांच में सामने आया है कि सिंचाई विभाग ने हिंडन नदी में तूफानी पानी छोड़ने के लिए एक हेड रेगुलेटर बनाने की योजना बनाई थी। इसके लिए वर्ष 2016 में नोएडा अथॉरिटी से 13.05 लाख रुपये भी जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद यह योजना आज तक जमीन पर नहीं उतर सकी।

रेगुलेटर न बनने के कारण बारिश का पानी और आसपास की हाउसिंग सोसाइटियों का गंदा पानी उसी जगह जमा होता रहा, जिससे वह इलाका धीरे-धीरे बड़े तालाब में बदल गया। इसका असर यह हुआ कि आसपास की कई सोसाइटियों के बेसमेंट तक पानी भर गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार इस समस्या की शिकायत की, लेकिन नोएडा अथॉरिटी और संबंधित विभागों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

एनजीटी ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर मानते हुए सभी संबंधित विभागों को पक्षकार बनाया है और स्पष्ट किया है कि इस तरह की लापरवाही से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को होगी। माना जा रहा है कि आने वाली सुनवाई में जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए जा सकते हैं।

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