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Noida Plot Owners: आवासीय भूखंड मालिकों को निर्माण पूरा करने का अंतिम मौका

Noida Plot Owners: आवासीय भूखंड मालिकों को निर्माण पूरा करने का अंतिम मौका

नोएडा। लंबे समय से खाली पड़े आवासीय भूखंडों को लेकर Noida Authority ने बड़ा फैसला लिया है। ऐसे भूखंड मालिक जिन्होंने तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया या पूरा नहीं किया है, उन्हें प्राधिकरण अब अंतिम एक और मौका देने जा रहा है। इसके तहत निर्धारित शुल्क जमा कराकर भूखंड मालिकों को निर्माण पूरा करने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

यह निर्णय पिछले महीने हुई प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में लिया गया था, जिसे अब लागू कर दिया गया है। प्राधिकरण द्वारा जारी सूचना के अनुसार, जिन आवासीय भूखंडों पर रजिस्ट्री के 12 साल बाद भी निर्माण नहीं हुआ है, उनके मालिकों को सात अगस्त तक आवेदन करना होगा। तय समय के भीतर आवेदन करने वाले लोगों को राहत देते हुए निर्माण पूरा करने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक अतिरिक्त समय लेने के लिए भूखंड मालिकों को आवंटन दर का 10 प्रतिशत शुल्क जमा करना होगा। शुल्क जमा होने के बाद संबंधित भूखंड मालिक को निर्माण कार्य पूरा करने के लिए एक वर्ष की अवधि दी जाएगी। इस दौरान उन्हें भवन निर्माण पूरा कर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि सामान्य नियमों के तहत भूखंड की रजिस्ट्री होने के बाद निर्माण कार्य पूरा करने के लिए पांच साल का समय दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर समयवृद्धि शुल्क लेकर इस अवधि को अधिकतम 12 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद भी यदि निर्माण नहीं होता है तो प्राधिकरण के पास आवंटन निरस्त करने का अधिकार होता है।

अधिकारियों का कहना है कि शहर में बड़ी संख्या में ऐसे भूखंड हैं जहां वर्षों से निर्माण नहीं हुआ। इससे न केवल जमीन खाली पड़ी रहती है बल्कि आसपास के क्षेत्रों के विकास पर भी असर पड़ता है। कई जगह खाली प्लॉटों के कारण गंदगी, अवैध कब्जे और सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी सामने आती हैं। इसी वजह से प्राधिकरण अब सख्ती के साथ निर्माण प्रक्रिया को पूरा करवाना चाहता है।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि भूखंड मालिक अतिरिक्त समय मिलने के बाद भी तय अवधि में निर्माण पूरा नहीं करते और अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में भूखंड वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से शहर में रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं को गति मिलेगी और खाली पड़े प्लॉटों पर निर्माण शुरू होने से क्षेत्र का विकास भी तेज होगा। साथ ही प्राधिकरण को राजस्व प्राप्त होगा और शहरी ढांचे को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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