National Nurses Award: राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार घटाने पर नर्सों में नाराजगी! एआईजीएनएफ ने पीएम मोदी से की संख्या बढ़ाने की मांग
National Nurses Award: राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार घटाने पर नर्सों में नाराजगी! एआईजीएनएफ ने पीएम मोदी से की संख्या बढ़ाने की मांग
अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस से पहले देशभर के नर्सिंग समुदाय में राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कारों की संख्या कम किए जाने को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन यानी एआईजीएनएफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इन पुरस्कारों की संख्या फिर से बढ़ाने की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय नर्स पुरस्कारों की संख्या 51 से घटाकर केवल 15 कर देना नर्सिंग पेशे से जुड़े लाखों लोगों के लिए निराशाजनक और मनोबल गिराने वाला फैसला है।
एआईजीएनएफ की राष्ट्रीय सलाहकार जी.के. खुराना, अध्यक्ष रिंकी डांग और महासचिव अनीता पंवार द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है कि नर्सें देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं और हर परिस्थिति में मरीजों की सेवा करती हैं। महामारी, आपदा और सामान्य दिनों में भी नर्सें लगातार 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाओं में जुटी रहती हैं। ऐसे में उनके सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान की संख्या कम करना उनके योगदान को कम आंकने जैसा माना जा रहा है।
फेडरेशन ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1973 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा की गई थी। यह सम्मान हर साल 12 मई को आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती के अवसर पर उत्कृष्ट सेवाएं देने वाली नर्सों को प्रदान किया जाता है। इन पुरस्कारों के तहत रक्षा सेवाओं, रेलवे, राज्य और केंद्र सरकार के अस्पतालों, ईएसआईसी, निजी अस्पतालों, मिशनरी संस्थानों और ग्रामीण तथा दुर्गम इलाकों में कार्यरत नर्सिंग पेशेवरों को सम्मानित किया जाता रहा है।
एआईजीएनएफ ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान नर्सों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मानवता की सेवा की थी। उस दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने भी “नर्सिंग में निवेश करें” का संदेश दिया था और वर्ष 2020 को “नर्सों और दाइयों का वर्ष” घोषित किया गया था। फेडरेशन के मुताबिक भारत में लगभग 17 लाख नर्सें कार्यरत हैं, जो देश की कुल स्वास्थ्य कार्यबल का करीब 66 प्रतिशत हिस्सा हैं।
फेडरेशन ने यह भी कहा कि नर्सें मरीजों के साथ सबसे ज्यादा समय बिताती हैं और संक्रमण रोकथाम, रोग नियंत्रण, मरीज सुरक्षा तथा सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उनके योगदान को अक्सर पर्याप्त सम्मान नहीं मिल पाता। एआईजीएनएफ ने सरकार से अपील की है कि पुरस्कारों की संख्या कम करने के बजाय कम से कम 100 तक बढ़ाई जाए ताकि अधिक से अधिक नर्सिंग पेशेवरों को सम्मान और प्रोत्साहन मिल सके। फेडरेशन का मानना है कि इससे न केवल नर्सों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था भी और मजबूत होगी।





