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Medicine Safety: दवाओं में जहरीली मिलावट पर सख्ती, खांसी की सिरप समेत सभी लिक्विड दवाओं की होगी कड़ी जांच

Medicine Safety: दवाओं में जहरीली मिलावट पर सख्ती, खांसी की सिरप समेत सभी लिक्विड दवाओं की होगी कड़ी जांच

दवाओं में जहरीले रसायनों की मिलावट को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। बाजार में बिकने वाली खांसी की सिरप और अन्य लिक्विड दवाओं में अगर खतरनाक रसायनों की थोड़ी मात्रा भी पहुंच जाती है तो यह मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसी को देखते हुए भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) ने दवा जांच की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकारी प्रयोगशालाओं को विशेष प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है।

आईपीसी की ओर से गाजियाबाद स्थित परिसर में 22 से 23 जून तक दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में हरियाणा, गोवा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय की सरकारी दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं के दवा विश्लेषकों ने हिस्सा लिया।

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने दवा विश्लेषकों को अत्याधुनिक गैस क्रोमैटोग्राफी तकनीक की व्यावहारिक जानकारी दी। इस तकनीक के माध्यम से दवाओं में मौजूद एथिलीन ग्लाइकोल (ईजी) और डाइएथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) जैसे जहरीले रसायनों की पहचान और उनकी मात्रा का पता लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एथिलीन ग्लाइकोल और डाइएथिलीन ग्लाइकोल बेहद खतरनाक रसायन हैं, जिनका दवाओं में इस्तेमाल प्रतिबंधित है। कई बार ये रसायन कच्चे माल जैसे ग्लिसरीन या प्रोपिलीन ग्लाइकोल में मिलावट के कारण दवाओं तक पहुंच सकते हैं।

इन जहरीले रसायनों की थोड़ी मात्रा भी शरीर के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इनके सेवन से किडनी फेल होने, तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचने और कई मामलों में मरीज की मौत तक का खतरा रहता है। खासतौर पर बच्चों में दूषित खांसी की सिरप के मामलों ने पहले भी चिंता बढ़ाई है।

आईपीसी के वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेलवन ने कहा कि दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए दवा नियामक प्रयोगशालाओं की जांच क्षमता को लगातार मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि बेहतर जांच व्यवस्था से दवाओं में किसी भी तरह की खतरनाक मिलावट का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।

सरकार की ओर से अक्टूबर 2025 से लागू किए गए नए मानकों के तहत सभी मौखिक तरल दवाओं में एथिलीन ग्लाइकोल और डाइएथिलीन ग्लाइकोल की जांच अनिवार्य कर दी गई है। इस नई व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सरकारी लैब के कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग दी जा रही है।

आईपीसी का यह कदम मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दवा निर्माण प्रक्रिया में गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में देशभर की दवा जांच प्रयोगशालाओं को और सक्षम बनाया जाएगा, जिससे बाजार में पहुंचने वाली दवाओं की निगरानी और सख्त हो सके।

 

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