IVF Regulation: आईवीएफ और सरोगेसी क्लीनिकों पर कसा शिकंजा, नियमित निगरानी और पंजीकरण नवीनीकरण अनिवार्य

IVF Regulation: आईवीएफ और सरोगेसी क्लीनिकों पर कसा शिकंजा, नियमित निगरानी और पंजीकरण नवीनीकरण अनिवार्य

 

देश में बढ़ते बांझपन के मामलों और आईवीएफ, एआरटी (असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी) तथा सरोगेसी सेवाओं के विस्तार के बीच केंद्र सरकार ने फर्टिलिटी क्लीनिकों की निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। मरीजों की सुरक्षा, उपचार की गुणवत्ता और कानूनी नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एआरटी और सरोगेसी नियमों में बदलाव करते हुए सभी पंजीकृत केंद्रों के लिए समय-समय पर पंजीकरण नवीनीकरण अनिवार्य कर दिया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, अब देशभर के सरोगेसी क्लीनिकों और एआरटी केंद्रों को निर्धारित समय के बाद अपना पंजीकरण नवीनीकृत कराना होगा। नए प्रावधानों के तहत सरोगेसी क्लीनिकों का पंजीकरण हर तीन वर्ष में और एआरटी क्लीनिकों का पंजीकरण हर पांच वर्ष में नवीनीकरण करना जरूरी होगा।

नियमों के अनुसार, क्लीनिकों और एआरटी बैंकों को पंजीकरण की अवधि समाप्त होने से कम से कम 60 दिन पहले राष्ट्रीय रजिस्ट्री पोर्टल पर नवीनीकरण के लिए आवेदन करना होगा। इससे सरकार के पास देशभर में संचालित फर्टिलिटी केंद्रों की अद्यतन जानकारी उपलब्ध रहेगी और उनकी गतिविधियों की बेहतर निगरानी की जा सकेगी।

नए नियमों में नवीनीकरण शुल्क भी निर्धारित किया गया है। लेवल-1 एआरटी क्लीनिकों और एआरटी बैंकों के लिए 25 हजार रुपये शुल्क तय किया गया है, जबकि लेवल-2 एआरटी क्लीनिकों और सरोगेसी क्लीनिकों के लिए यह शुल्क एक लाख रुपये रखा गया है।

सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए भी प्रावधान किए हैं। यदि किसी क्लीनिक या संस्था का आवेदन खारिज किया जाता है तो उससे पहले संबंधित संस्था को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। वहीं, कमियां दूर कर दोबारा आवेदन करने पर पुनर्विचार के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा

विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और पंजीकरण नवीनीकरण की व्यवस्था से फर्टिलिटी केंद्रों में गुणवत्ता मानकों, सुरक्षा प्रोटोकॉल, दस्तावेजों के रखरखाव और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इससे मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि नए नियमों के कारण छोटे शहरों में संचालित कुछ फर्टिलिटी केंद्रों पर अनुपालन का अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। उन्हें नए मानकों के अनुसार अपनी व्यवस्था और रिकॉर्ड प्रणाली को मजबूत करना होगा।

देश में आईवीएफ, एआरटी और सरोगेसी सेवाओं की मांग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। देर से शादी, बढ़ती उम्र में परिवार शुरू करने की योजना, तनावपूर्ण जीवनशैली और बांझपन के बढ़ते मामलों के कारण बड़ी संख्या में लोग इन तकनीकों का सहारा ले रहे हैं।

सेवाओं की बढ़ती मांग के साथ देशभर में बड़ी संख्या में फर्टिलिटी क्लीनिक भी खुले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त निगरानी नहीं होने पर कुछ केंद्रों में गुणवत्ता, सुरक्षा और कानूनी नियमों के उल्लंघन की संभावना बनी रहती है।

इसी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है ताकि फर्टिलिटी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाई जा सके, मरीजों के अधिकारों की रक्षा हो और अनियमित या अनैतिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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