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Medicinal Plants Research औषधीय पौधों पर शोध को नई गति, आयुष मंत्रालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के बीच हुआ अहम करार

Medicinal Plants Research औषधीय पौधों पर शोध को नई गति, आयुष मंत्रालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के बीच हुआ अहम करार

नई दिल्ली, 15 जुलाई। देश में औषधीय पौधों के वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और व्यावसायिक उपयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) और दिल्ली विश्वविद्यालय के भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज (बीसीएएस) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी के माध्यम से औषधीय पौधों के संरक्षण, मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन), आधुनिक तकनीकों के विकास और उद्योग से जुड़ी संभावनाओं को बढ़ावा देने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा।

इस समझौते के तहत दोनों संस्थान औषधीय पौधों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान करेंगे। इसमें औषधीय पौधों से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का विकास, कटाई के बाद की उन्नत तकनीकों (पोस्ट-हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी), इको-फ्रेंडली पैकेजिंग, तकनीक हस्तांतरण, गुणवत्ता सुधार और क्षमता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इसके साथ ही शोध के निष्कर्षों को उद्योग, किसानों और स्टार्टअप्स तक पहुंचाने के लिए भी प्रभावी तंत्र विकसित किया जाएगा।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने इस अवसर पर कहा कि भारत की समृद्ध पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और औषधीय वनस्पतियों का ज्ञान विश्वभर में अपनी अलग पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और नवीन तकनीकों के साथ जोड़कर वैश्विक स्तर पर भारत की औषधीय संपदा को नई पहचान दिलाई जाए।

उन्होंने कहा कि यह साझेदारी केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को नए अवसर उपलब्ध कराने तथा स्टार्टअप्स और उद्यमियों को नवाचार आधारित व्यवसाय विकसित करने में भी मदद मिलेगी। इससे औषधीय पौधों पर आधारित उद्योगों को भी नई तकनीक और बेहतर उत्पाद विकसित करने का अवसर मिलेगा।

प्रतापराव जाधव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित करना, उनके टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देना और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित करना है। इस दिशा में अनुसंधान संस्थानों और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता देश में औषधीय पौधों के क्षेत्र में नवाचार, वैज्ञानिक शोध और तकनीकी विकास को नई गति देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से औषधीय पौधों की गुणवत्ता, प्रसंस्करण और विपणन में सुधार होगा, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हर्बल उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। साथ ही पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और टिकाऊ उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा मिलने से हरित अर्थव्यवस्था और जैव-अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

यह समझौता भारत को औषधीय पौधों के अनुसंधान, संरक्षण और व्यावसायिक उपयोग के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे वैज्ञानिक संस्थानों, किसानों, उद्योग जगत और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा आयुष क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी नई मजबूती मिलेगी।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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