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 National Urea Investment Policy 2026: यूरिया में आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम, राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

 National Urea Investment Policy 2026: यूरिया में आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम, राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली, 15 जुलाई। देश को उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) द्वारा स्वीकृत इस नई नीति का उद्देश्य देश में गैस आधारित आधुनिक यूरिया संयंत्रों की स्थापना को बढ़ावा देना, घरेलू उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करना तथा यूरिया के आयात पर निर्भरता को कम करना है। सरकार का मानना है कि यह नीति कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

नई निवेश नीति के तहत देश और विदेश के निवेशकों के लिए आकर्षक एवं पारदर्शी व्यवस्था तैयार की गई है। सरकार ने निवेशकों को 12 से 16 प्रतिशत तक सुनिश्चित रिटर्न, पारदर्शी लागत निर्धारण प्रणाली तथा विदेशी मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा जैसी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं देने का प्रावधान किया है। इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के निवेशकों को नए गैस आधारित यूरिया संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रेरित करना है।

सरकार के अनुसार, नई नीति के अंतर्गत स्थापित होने वाले प्रत्येक नए यूरिया संयंत्र से 250 करोड़ रुपये से अधिक की संभावित बचत होगी। इससे न केवल सरकारी वित्तीय बोझ कम होगा, बल्कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात पर होने वाला भारी विदेशी मुद्रा व्यय भी घटेगा। इसके परिणामस्वरूप देश की आर्थिक मजबूती के साथ उर्वरक क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

वर्तमान समय में भारत में कुल 33 यूरिया संयंत्र संचालित हैं, जिनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता लगभग 269.42 लाख मीट्रिक टन है। इसके बावजूद देश में यूरिया की बढ़ती मांग को देखते हुए हर वर्ष बड़ी मात्रा में आयात करना पड़ता है। यह आयात सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार डालता है और वैश्विक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी भारतीय कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। नई नीति का उद्देश्य इसी निर्भरता को कम करते हुए घरेलू उत्पादन को मांग के अनुरूप बढ़ाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गैस आधारित आधुनिक संयंत्र पुराने संयंत्रों की तुलना में अधिक ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। ऐसे संयंत्रों के माध्यम से उत्पादन लागत में कमी आएगी, ऊर्जा की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन भी अपेक्षाकृत कम होगा। इससे देश के सतत विकास और हरित औद्योगिक ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।

सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 के लागू होने से उर्वरक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा, नई औद्योगिक परियोजनाओं को गति मिलेगी और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इसके साथ ही घरेलू उत्पादन बढ़ने से किसानों को बुवाई और फसल उत्पादन के महत्वपूर्ण समय पर यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को भी बल मिलेगा।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नीति केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य भारत को उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना, आयात पर होने वाले खर्च को कम करना और किसानों को सस्ती एवं समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना है। इस निर्णय को कृषि क्षेत्र और देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी कदम माना जा रहा है।

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