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Liver Disease: हर तीसरा भारतीय लिवर रोग की चपेट में, 38% आबादी फैटी लिवर से प्रभावित

Liver Disease: हर तीसरा भारतीय लिवर रोग की चपेट में, 38% आबादी फैटी लिवर से प्रभावित

नई दिल्ली, 28 जुलाई। लिवर की बीमारी अब केवल शराब के सेवन से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है। खराब खानपान, बढ़ता मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और दूषित पानी जैसे कारण देश में लिवर संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत की करीब 38 प्रतिशत आबादी फैटी लिवर से प्रभावित है, जबकि बच्चों में भी इसके शुरुआती संकेत सामने आ रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, लिवर रोगों को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है, जब लिवर सिरोसिस, कैंसर या लिवर फेलियर जैसी गंभीर स्थिति विकसित हो चुकी होती है।

विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर एम्स दिल्ली के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रमोद गर्ग और डॉ. शालीमार ने बदलती जीवनशैली और संक्रमण के कारण बढ़ते लिवर रोग के बोझ को लेकर चिंता जताई। विशेषज्ञों के अनुसार फैटी लिवर की समस्या बच्चों और युवाओं में भी तेजी से सामने आ रही है।

हेपेटाइटिस-बी और सी के करोड़ों मरीज

डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में करीब 25.4 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-बी और करीब पांच करोड़ लोग हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं। इनमें लगभग 12 प्रतिशत मरीज भारत में हैं। देश में करीब चार करोड़ लोग हेपेटाइटिस-बी और 60 से 120 लाख लोग हेपेटाइटिस-सी के दीर्घकालिक संक्रमण से जूझ रहे हैं।

चिंता की बात यह है कि हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित केवल करीब 13 प्रतिशत और हेपेटाइटिस-सी के करीब 36 प्रतिशत मरीजों की ही अब तक पहचान हो सकी है। इससे बड़ी संख्या में संक्रमित लोगों के बिना जानकारी के रहने का खतरा बना हुआ है।

डॉ. शालीमार और डॉ. साग्निक बिस्वास के अनुसार, हेपेटाइटिस-बी और सी कई वर्षों तक बिना स्पष्ट लक्षणों के शरीर में मौजूद रह सकते हैं। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर सिरोसिस और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

वहीं हेपेटाइटिस-ए और ई मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन से फैलते हैं। एम्स के अध्ययन में एक्यूट लिवर फेलियर के करीब 30 प्रतिशत मामलों में इन दोनों वायरस की भूमिका सामने आई। ऐसे मामलों में मृत्यु दर 50 प्रतिशत से अधिक होने की बात भी बताई गई है।

कैसे करें लिवर रोगों से बचाव?

डॉ. शालीमार के अनुसार, समय पर जांच, हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण, स्वच्छ पेयजल, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से लिवर संबंधी कई बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध मुफ्त जांच और उपचार सुविधाओं का लाभ उठाने की अपील की।

विशेषज्ञों के मुताबिक, 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को खत्म करने के वैश्विक लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार पर्याप्त नहीं होगा। लोगों में जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच कराना और बीमारी के शुरुआती संकेतों को गंभीरता से लेना भी उतना ही जरूरी है।

 

 

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संवाददाता

Priyanka Singh

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