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Land Fraud Case: फर्जी आधार-पैन कार्ड से कृषि भूमि हड़पने का आरोप, करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में फुम्मन सिंह की जमानत अर्जी खारिज

Land Fraud Case: फर्जी आधार-पैन कार्ड से कृषि भूमि हड़पने का आरोप, करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में फुम्मन सिंह की जमानत अर्जी खारिज

नोएडा। फर्जी दस्तावेज तैयार कर कृषि भूमि की रजिस्ट्री कराने और करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में सत्र अदालत ने आरोपी फुम्मन सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने अपराध की गंभीरता और मामले से जुड़े तथ्यों को देखते हुए आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला जेवर थाने में दर्ज मुकदमे से संबंधित है।

मामले के वादी गुरदीप सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि अमरपुर पालका स्थित करीब 1.29 हेक्टेयर कृषि भूमि उसने वर्ष 2015 में बैनामे के माध्यम से खरीदी थी। इसके बाद से वह जमीन पर मालिकाना हक रखते हुए काबिज था।

आरोप है कि एक जालसाज गिरोह ने इस कृषि भूमि को हड़पने के लिए योजनाबद्ध तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किए। गुरदीप सिंह के नाम पर किसी दूसरे व्यक्ति को खड़ा किया गया और उसके आधार कार्ड तथा पैन कार्ड की कथित तौर पर कूटरचना की गई।

आरोपियों ने इन्हीं फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए रजिस्ट्रार कार्यालय जेवर में जमीन का बैनामा कराया। आरोप के मुताबिक 23 दिसंबर 2023 और तीन जनवरी 2024 को जमीन से संबंधित बैनामे फर्जी तरीके से कराए गए और भूमि पर मालिकाना हक बदलने का प्रयास किया गया।

मामला सामने आने के बाद गुरदीप सिंह ने पुलिस से शिकायत की। इसके आधार पर जेवर थाने में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई। जांच में जमीन की रजिस्ट्री, पहचान संबंधी दस्तावेज और कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई।

मुकदमे में रेखा यादव, पुष्पा शर्मा, शकुंतला देवी, कनकलता, स्वाति यादव, सुधीर कुमार शर्मा, सरिता सक्सैना और कौशल कुमार समेत कुछ अज्ञात लोगों को भी साजिश में शामिल बताया गया है। पुलिस मामले में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार फुम्मन सिंह ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर कथित रूप से फर्जी तरीके से कृषि भूमि को बेचने की साजिश रची और इसके माध्यम से करोड़ों रुपये वसूले। अभियोजन ने अदालत के सामने मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।

दूसरी तरफ आरोपी फुम्मन सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता ने जमानत के समर्थन में तर्क देते हुए कहा कि मामले के सह-आरोपी जसबीर को उच्च न्यायालय से पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसी आधार पर आरोपी को भी जमानत दिए जाने की मांग की गई।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और मामले से संबंधित तथ्यों पर विचार किया। अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए अदालत ने फुम्मन सिंह की जमानत अर्जी स्वीकार करने का आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया।

मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। फिलहाल पुलिस और अभियोजन पक्ष फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कराने और कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े तथ्यों की जांच और कानूनी कार्रवाई में जुटे हैं।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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