Illegal Electricity Connections: नोएडा के डूब क्षेत्र में 13 हजार अवैध बिजली कनेक्शन का मामला गरमाया, सीएम योगी की नाराजगी के बाद विभाग ने शुरू की कार्रवाई
नोएडा। नोएडा के डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कथित अवैध बिजली कनेक्शन का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। क्षेत्र में करीब 13 हजार अवैध बिजली कनेक्शन होने की बात सामने आने के बाद यह मुद्दा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उठाया गया। इसके बाद बिजली विभाग ने डूब क्षेत्र में अवैध कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें बंद करने और अवैध बिजली लाइनों को काटने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
बताया गया है कि स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री के सामने डूब क्षेत्र में कथित रूप से अवैध तरीके से दिए गए बिजली कनेक्शनों का मामला रखा। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल से जवाब तलब किया और पूरे प्रकरण पर नाराजगी जताई।
मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद बिजली विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। विभाग की टीमों ने डूब क्षेत्र में अवैध बिजली नेटवर्क के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में छिजारसी गांव में बिजली कनेक्शनों और मीटरों की जांच की जा रही है।
बिजली विभाग की टीमें क्षेत्र में पहुंचकर संदिग्ध मीटर, बिजली लाइन और कनेक्शनों की वैधता की जांच कर रही हैं। जांच में अवैध पाए जाने वाले कनेक्शनों को बंद करने के साथ ऐसी बिजली लाइनों को काटने की कार्रवाई की जा रही है, जिनके माध्यम से कथित तौर पर अनधिकृत बिजली आपूर्ति की जा रही थी।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस डूब क्षेत्र में वर्ष 2017 से नए बिजली कनेक्शन जारी करने पर रोक बताई जा रही है, वहां इतनी बड़ी संख्या में बिजली कनेक्शन कैसे पहुंच गए। हजारों कथित अवैध कनेक्शन सामने आने के बाद विभागीय निगरानी और स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
बिजली विभाग के आंकड़ों के मुताबिक संबंधित इलाके में करीब 3,800 वैध बिजली कनेक्शन हैं। इसके मुकाबले डूब क्षेत्र में हजारों कनेक्शनों को अवैध बताया जा रहा है। पूरे डूब क्षेत्र में ऐसे कनेक्शनों की संख्या करीब 13 हजार तक होने का अनुमान सामने आया है। हालांकि वास्तविक संख्या विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आरोप है कि डूब क्षेत्र में एक निजी सिंडिकेट ने अवैध तरीके से मीटर लगाकर लोगों को बिजली उपलब्ध कराने का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। इस नेटवर्क के जरिए बिजली की आपूर्ति किस स्रोत से और किसकी मिलीभगत से की जा रही थी, इसकी जांच की जा रही है।
कथित तौर पर प्रत्येक कनेक्शन के एवज में उपभोक्ताओं से न्यूनतम करीब एक हजार रुपये तक की रकम वसूली जाती थी। हजारों कनेक्शनों के आधार पर इस नेटवर्क के माध्यम से हर महीने करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक की वसूली किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इस राशि की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही सामने आएगी।
डूब क्षेत्र में वर्ष 2017 से नए बिजली कनेक्शन पर रोक होने के कारण मामला और गंभीर माना जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि प्रतिबंध के बावजूद हजारों की संख्या में कथित अवैध मीटर कैसे लगाए गए और इतने बड़े स्तर पर बिजली वितरण का नेटवर्क वर्षों तक किस तरह संचालित होता रहा।
इस मामले के सामने आने के बाद बिजली विभाग की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। जांच में यह पता लगाने की जरूरत होगी कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों को इस नेटवर्क की जानकारी थी या नहीं और यदि जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
डूब क्षेत्र में बनी बड़ी इमारतों, फार्म हाउस और अन्य निर्माणों तक बिजली पहुंचने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जिन निर्माणों की वैधता और नियमों के पालन को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं, वहां बिजली की आपूर्ति किस आधार पर और किस माध्यम से की गई, इसकी भी पड़ताल किए जाने की उम्मीद है।
नोएडा के मुख्य अभियंता एसके जैन के मुताबिक अवैध बिजली नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बिजली विभाग की टीमें अवैध कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें बंद कर रही हैं। जिन स्थानों पर अवैध बिजली लाइनें मिल रही हैं, उन्हें काटा जा रहा है।
विभाग का दावा है कि कथित सिंडिकेट से जुड़े लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की गई है। जांच के आधार पर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्य अभियंता के अनुसार डूब क्षेत्र में चलाया जा रहा अभियान केवल एक या दो दिन तक सीमित नहीं रहेगा। विभाग की टीमें रोजाना अभियान चलाकर अवैध कनेक्शनों की पहचान करेंगी और कथित अवैध बिजली नेटवर्क को समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा।
अब जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि वर्ष 2017 से नए बिजली कनेक्शन देने पर रोक के बावजूद डूब क्षेत्र में हजारों कथित अवैध कनेक्शन किस तरह दिए गए, इस नेटवर्क को संचालित करने में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसके जरिए वास्तव में कितनी रकम की वसूली की गई।
मामले के शासन स्तर तक पहुंचने और मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद कार्रवाई तेज होने से बिजली विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आ सकती है। फिलहाल विभाग अवैध कनेक्शन काटने के साथ पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटा है।


