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आतिथ्य सुविधाओं के लिए हरियाणा लागू करेगा स्वच्छता ग्रीन लीफ रेटिंग सिस्टम : टी.वी.एस.एन. प्रसाद

सड़क के साथ लगती सुविधाओं और सड़क के साथ अपशिष्ट निपटान के निर्माण के लिए होगा टास्क फोर्स का गठन

 

चंडीगढ़ 12 जून-(कोमल रमोला ) हरियाणा के मुख्य सचिव श्री टी.वी.एस.एन. प्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार ने आतिथ्य सुविधाओं के लिए स्वैच्छिक आधार पर स्वच्छता ग्रीन लीफ रेटिंग सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है। यह प्रणाली उन्हें “सुरक्षित तौर पर प्रबंधित स्वच्छता” को बढ़ावा देने वाली प्रथाओं का पालन करने और स्टार-रेटिंग प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

श्री प्रसाद ने यह जानकारी आज यहां आतिथ्य सुविधाओं में स्वच्छता ग्रीन लीफ रेटिंग पर आयोजित पहली बैठक की अध्यक्षता करने के बाद दी।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली आतिथ्य सुविधाओं के संचालकों को पर्याप्त बुनियादी ढांचा विकसित करने, अच्छी प्रथाओं को अपनाने और जिम्मेदार पर्यटन के हिस्से के तौर पर स्वच्छता और सफाई पर जागरूकता पैदा करने में मदद करेगी। स्वच्छता ग्रीन लीफ रेटिंग प्रणाली ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) प्लस का दर्जा प्राप्त करने के साथ-साथ स्वच्छता और सफाई के प्रोत्साहक के रूप में आतिथ्य संस्थाओं के लिए एक सकारात्मक छवि और ब्रांडिंग बनाने के लिए डिजाइन की गई है। इसके लक्ष्य समूह में सभी तरह की सार्वजनिक और निजी पर्यटक सुविधाएं जैसे होटल, होम स्टे, धर्मशालाएं, लॉन्ज, पोर्टेबल शौचालय सुविधाएं या ट्रैकिंग समूह सहित शिविर भी शामिल हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि सार्वजनिक और निजी पर्यटक सुविधाओं में आम जनता, विशेषकर पर्यटकों के लिए साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए सड़क के साथ लगती सुविधाओं और सड़क के साथ अपशिष्ट निपटान के निर्माण के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजमार्गों पर स्थित ढाबों और पेट्रोल पंपों पर सार्वजनिक शौचालयों की सफाई के लिए मिशन मोड में अभियान चलाया जाना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए प्रत्येक जिले में एक ढाबा और एक पेट्रोल पंप को पायलट आधार पर लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के माध्यम से स्वच्छता ग्रीन लीफ कार्यकर्ता के रूप में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सभी हितधारकों की कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी ताकि उन्हें अवधारणा और प्रक्रिया के विषय में संवेदनशील बनाया जा सके और उनसे फीडबैक भी लिया जा सके।

स्वच्छता ग्रीन लीफ रेटिंग प्रणाली के कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए, एक त्रि-स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इसमें मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति, उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति और एस.डी.एम. की अध्यक्षता वाली सत्यापन उप-समिति शामिल हैं।

मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा पर्यटन मंत्रालय के साथ मिलकर देश की आतिथ्य सुविधाओं में स्वच्छता ग्रीन लीफ रेटिंग प्रणाली शुरू की गई है। रेटिंग प्रणाली देश की आतिथ्य सुविधाओं को संवेदनशील बनाएगी। उन्होंने कहा कि सभी सार्वजनिक शौचालयों की मैपिंग की जाएगी ताकि लोगों को इस सुविधा का उपयोग करने में आसानी हो।

डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि आतिथ्य सुविधा को रैंकिंग देने के लिए तीन केंद्रित थीम हैं जैसे-सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, फेकल स्लज मैनेजमेंट (मानव मल का प्रबंधन) और ग्रे वाटर मैनेजमेंट। इन थीमों के मापदंडों को चार खंडों में विभाजित किया गया है-बुनियादी ढांचे से संबंधित, प्रथाओं से संबंधित, जागरूकता पैदा करने से संबंधित (उद्देश्यों के लिए प्रचार) और सुविधा में इन विषयों पर प्रदर्शित कोई भी नवाचार। कुल 200 अंक दिए जाने हैं, जिनमें से 80 अंक फेकल स्लज मैनेजमेंट (मानव मल प्रबंधन), 80 अंक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और 40 अंक ग्रे वाटर मैनेजमेंट के लिए हैं। भाग लेने वाली संस्थाओं को स्वच्छता ग्रीन लीफ प्रमाणन के लिए पात्र बनने के लिए प्रत्येक विषय में कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे।

बैठक में धरोहर एवं पर्यटन विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती कला रामचंद्रन, ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक श्री जय कृष्ण अभीर तथा पर्यटन विभाग के निदेशक श्री प्रभजोत सिंह समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

 

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