anmol test yojana: Anmol Test योजना से नवजातों की जांच में क्रांति, एक बूंद खून से 56 बीमारियों का पता

anmol test yojana: Anmol Test योजना से नवजातों की जांच में क्रांति, एक बूंद खून से 56 बीमारियों का पता

नई दिल्ली, 25 मार्च : राजधानी में नवजात शिशुओं की बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली सरकार ने ‘अनमोल टेस्ट योजना’ लागू करने की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब नवजात शिशुओं के खून की सिर्फ एक बूंद से 56 प्रकार के मेटाबॉलिक और जेनेटिक रोगों की पहचान संभव हो सकेगी। इस पहल का उद्देश्य जन्म के तुरंत बाद ही गंभीर बीमारियों का पता लगाकर समय पर इलाज शुरू करना है, जिससे शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके और बच्चों को स्वस्थ जीवन की बेहतर शुरुआत मिल सके।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने इस योजना की जानकारी देते हुए कहा कि नवजात शिशु केवल परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि सरकार के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि ‘अनमोल’ यानी एडवांस्ड न्यू बोर्न मॉनिटरिंग एंड ऑप्टिमल लाइफकेयर योजना के तहत जन्म के तुरंत बाद शिशु की स्क्रीनिंग की जाएगी। इस टेस्ट के माध्यम से उन बीमारियों की भी पहचान की जा सकेगी जो जन्म के समय दिखाई नहीं देतीं, लेकिन आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती हैं।

इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बीमारी के शुरुआती संकेत मिलते ही डॉक्टर तुरंत इलाज शुरू कर सकेंगे। इससे कई गंभीर और दुर्लभ बीमारियों को नियंत्रित करना या पूरी तरह ठीक करना संभव हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान ही कई जटिल बीमारियों के उपचार की कुंजी है और यह योजना उसी दिशा में एक मजबूत पहल है।

‘अनमोल टेस्ट योजना’ विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए राहत लेकर आएगी, क्योंकि उन्हें महंगे जांच परीक्षणों का खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। फिलहाल इस योजना को सरकारी अस्पतालों में लागू किया जा रहा है, जिसे भविष्य में और व्यापक स्तर पर विस्तार देने की योजना है।

इस टेस्ट के जरिए जिन प्रमुख बीमारियों की पहचान की जा सकेगी, उनमें डाउन सिंड्रोम, सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया, पीकेयू, फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम, हीमोफीलिया और सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी गंभीर स्थितियां शामिल हैं। इन बीमारियों का समय पर पता चलने से बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकेगा और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल पाएगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ते जन्मजात और आनुवंशिक रोगों के मामलों को देखते हुए इस तरह की स्क्रीनिंग व्यवस्था बेहद जरूरी है। इससे न केवल बच्चों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि लंबे समय में स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा। दिल्ली सरकार की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

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