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जेपी इंफ्राटेक मामले में आया नया मोड़, यमुना प्राधिकरण और सुरक्षा समूह में बनी सहमति

जेपी इंफ्राटेक मामले में आया नया मोड़, यमुना प्राधिकरण और सुरक्षा समूह में बनी सहमति

अमर सैनी

नोएडा। जेपी इंफ्राटेक मामले में नया मोड़ आया है। इस मामले को लेकर यमुना प्राधिकरण और सुरक्षा समूह के बीच बातचीत शुरू हो गई है। गुरुवार को दोनों पक्षों के बीच एक बैठक हुई, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और आपसी सहयोग से समस्याओं के समाधान पर सहमति बनी। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। इस मामले से जुड़े सभी 20 हजार घर खरीदारों की निगाहें अब आगे की प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।
जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण को लेकर राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने हाल ही में सुरक्षा समूह के पक्ष में फैसला सुनाया था। न्यायाधिकरण ने कंपनी को यमुना प्राधिकरण का बकाया 1689 करोड़ रुपये के बजाय 1334.31 करोड़ रुपये चार किश्तों में चुकाने की बड़ी राहत दी है। इस मामले में शासन स्तर से भी रिपोर्ट तलब की गई है। वहीं, यमुना प्राधिकरण ने भी किसानों को 355 करोड़ रुपये का मुआवजा देने के लिए अपनी जेब से भुगतान करने का फैसला किया है। गुरुवार की बैठक में प्राधिकरण और सुरक्षा समूह के बीच कई बिंदुओं पर सहमति बनी है। इस मामले में यमुना प्राधिकरण और सुरक्षा समूह के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच हुई बैठक से संकेत मिलते हैं कि वे आपसी सहयोग से इस मसले का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। यमुना प्राधिकरण और सुरक्षा समूह के बीच बातचीत दौर आगे भी जारी रहेगा।

7936 करोड़ रुपये से जुड़ा मामला

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने पिछले 7 मार्च 2023 को सुरक्षा ग्रुप द्वारा 7936 करोड़ रुपये के ऑफर द्वारा दिवालिया हो चुकी कंपनी जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण को मंजूरी दी थी। अधिग्रहण का यह फैसला जेपी समूह के घर खरीदारों के लिए किसी वरदान की तरह था। लेकिन इसके बाद ही यमुना अथॉरिटी, आयकर विभाग, जयप्रकाश असोसिएट लिमिटेड (जेपी असोसिएट) ने इस आदेश को चैंलेंज कर दिया था।

11 महीने से मामला NCLAT में लंबित था

दरअसल, ट्रिब्यूनल द्वारा सुरक्षा समूह के प्रस्ताव को स्वीकर कर लेने के बाद जेपी इंफ्राटेक की सिस्टर कंपनी जेपी असोसिएट ने मामले में अड़ंगा लगा दिया था। जेपी असोसिएट ने जेपी इंफ्राटेक के साथ किसी समय किए गए करार को ट्रिब्यूनल के सामने रखते हुए कहा कि इंफ्राटेक में होने वाले किसी भी काम पर जितना पैसा खर्च होगा, उसका 15 प्रतिशत पैसा जेपी एसोसिएट्स को लेने का हक है। इस पर 11 महीने से मामला NCLAT में लंबित था। अब इस पर फाइनल मुहर लग गई। अब जेपी असोसिएट को कोई पैसा शायद नहीं देना होगा।

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