Greater Noida West Housing: श्रमिकों के लिए बनेंगे किफायती फ्लैट, 2500 से ज्यादा यूनिट का प्लान
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में श्रमिकों के लिए किफायती आवास की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्राधिकरण ने पतवाड़ी गांव के पास करीब पांच एकड़ जमीन चिन्हित कर ली है, जहां हजारों श्रमिकों के लिए फ्लैट बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath श्रमिक दिवस के अवसर पर इस परियोजना सहित कई योजनाओं का वर्चुअल शिलान्यास करेंगे।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के तहत वन बीएचके और टू बीएचके फ्लैट बनाए जाएंगे। प्रारंभिक योजना के अनुसार यहां 2500 से अधिक फ्लैट विकसित किए जा सकते हैं। इसके लिए डिजाइन तैयार किया जा रहा है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है।
दरअसल, जिले में श्रमिकों के लिए आवास एक बड़ी समस्या बन चुकी है। शहरी क्षेत्र में किराए के कमरे का किराया 4000 से 5000 रुपये तक पहुंच चुका है, जिससे कम आय वाले श्रमिकों के लिए रहना मुश्किल हो रहा है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने किफायती आवास योजना को प्राथमिकता दी है। हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलनों के बाद इस दिशा में काम और तेज कर दिया गया है।
इसके साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए ग्रेटर नोएडा वेस्ट के नॉलेज पार्क-5 में 350 बेड का मल्टीस्पेशलिटी ईएसआई अस्पताल बनाया जाएगा। इसके लिए सात एकड़ से अधिक जमीन Employees’ State Insurance Corporation को आवंटित कर दी गई है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
कामकाजी महिलाओं के लिए भी विशेष सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पहले चरण में तीन महिला हॉस्टल बनाने की योजना है, जिनमें दो इकोटेक-2 और एक इकोटेक-1 क्षेत्र में बनाए जाएंगे। प्रत्येक हॉस्टल एक-एक एकड़ जमीन पर तैयार होगा, जहां सुरक्षित और सुलभ आवास की सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए चार हॉस्टल भी बनाए जाएंगे। इकोटेक-3, 6, 12 और इकोटेक-1 एक्सटेंशन में इन हॉस्टलों का निर्माण किया जाएगा, जहां प्रत्येक में करीब 100 श्रमिकों के रहने की व्यवस्था होगी। साथ ही भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
श्रमिकों को रोजगार से जोड़ने के लिए सेक्टर इकोटेक-3 में एक श्रमिक सुविधा केंद्र भी बनाया गया है। यहां श्रमिकों और उद्यमियों के बीच समन्वय के लिए रजिस्टर प्रणाली विकसित की गई है, जिससे काम की उपलब्धता और श्रमिकों की जरूरत को आसानी से जोड़ा जा सके। भविष्य में ऐसे केंद्र अन्य औद्योगिक सेक्टरों में भी स्थापित किए जाएंगे।


