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Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में सड़क चौड़ीकरण और मरम्मत कार्य की रफ्तार धीमी, मानसून से पहले बढ़ी लोगों की चिंता

Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में सड़क चौड़ीकरण और मरम्मत कार्य की रफ्तार धीमी, मानसून से पहले बढ़ी लोगों की चिंता

नोएडा। ग्रेटर नोएडा में सड़क चौड़ीकरण और मरम्मत परियोजनाओं की धीमी रफ्तार से लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। शहर की प्रमुख सड़कों और 130 मीटर रोड के किनारे निर्माणाधीन बस-वे सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। बिटुमिन (डामर) की बढ़ती कीमतों और ठेकेदारों की कार्यशैली के कारण कई स्थानों पर निर्माण कार्य रुक गया है। मानसून नजदीक होने के चलते अधूरी और गड्ढों वाली सड़कों पर जलभराव की आशंका बढ़ गई है, जिससे आने वाले दिनों में लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट क्षेत्र में तिलपता गोलचक्कर से आगे 130 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे बनाए जा रहे बस-वे का निर्माण कार्य लंबे समय से बंद पड़ा है। सड़क किनारे गिट्टी डालकर काम अधूरा छोड़ दिया गया है। दूसरी ओर, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर को बेहतर कनेक्टिविटी देने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू की जा चुकी है, लेकिन बस-वे का निर्माण पूरा न होने के कारण यात्रियों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसी तरह एलजी गोलचक्कर से रामपुर गोलचक्कर तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क को चौड़ा करने का काम भी बीच में ही अटक गया है। एटीएस गोलचक्कर से विप्रो गोलचक्कर तक सड़क मरम्मत की निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम शुरू नहीं हो सका है। वहीं मकौड़ा गोलचक्कर के आसपास भी सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। कई जगहों पर सड़क किनारे खुदाई कर मिट्टी छोड़ दी गई है, जिससे दिनभर धूल उड़ती रहती है और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मुख्य सड़कों को चौड़ा करने, उनकी मरम्मत कराने और बस-वे विकसित करने की व्यापक योजना तैयार की थी। वर्तमान में 25 से अधिक सड़कों पर विभिन्न निर्माण कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए 71 सड़कों को धूल मुक्त बनाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है, जिनकी कुल लंबाई 263 किलोमीटर है। टूटी और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता देने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बीते महीने सड़कों के किनारे 50 से अधिक स्थानों पर धूल उड़ने की शिकायतों के बाद एनजीटी ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के परियोजना विभाग को नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद कई स्थानों पर निर्माण कार्यों की गति संतोषजनक नहीं है। सूत्रों के अनुसार कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को एक साथ कई परियोजनाओं की जिम्मेदारी दिए जाने से भी स्थिति प्रभावित हुई है। अधिक काम मिलने के कारण कई ठेकेदार समय पर परियोजनाएं पूरी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे विभिन्न स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरा रह गया है। बिटुमिन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने भी सड़क निर्माण परियोजनाओं की लागत बढ़ा दी है। इसके चलते कई ठेकेदार आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। सड़क चौड़ीकरण के लिए कई जगह खुदाई कर छोड़ दी गई है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय लोग लंबे समय से इन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग कर रहे हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी ने कहा कि बिटुमिन के बढ़े हुए दामों के कारण सड़क निर्माण लागत प्रभावित हुई है। पीडब्ल्यूडी के दिशा-निर्देशों के अनुसार नई दरें लागू करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और लोगों को बेहतर सड़क सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चौड़ीकरण और मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है तथा जल्द ही इन परियोजनाओं में तेजी लाई जाएगी।

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