Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में अवैध कॉलोनियों पर उठे सवाल, आतंकी छिपने के ठिकाने बनने का खतरा, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में अवैध कॉलोनियों पर उठे सवाल, आतंकी छिपने के ठिकाने बनने का खतरा, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
ग्रेटर नोएडा में आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद अवैध कॉलोनियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) द्वारा संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है कि क्या जिले की अवैध कॉलोनियां सुरक्षा के लिहाज से बड़ा खतरा बनती जा रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, गौतमबुद्ध नगर की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) एक बार फिर संदिग्ध गतिविधियों का समय रहते पता लगाने में नाकाम रही है। यह पहली बार नहीं है, जब बाहरी एजेंसियों ने कार्रवाई कर ऐसे लोगों को पकड़ा हो, जबकि स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी नहीं मिल पाई। इससे पहले भी कई नक्सली, मोस्ट वांटेड अपराधी और आतंकी संगठनों से जुड़े लोग शहर की कॉलोनियों और ऊंची इमारतों में छिपे मिले हैं।
बताया जा रहा है कि ग्रेटर नोएडा के छपरौला स्थित राम विहार कॉलोनी, जहां हाल में गिरफ्तार आरोपी रहते थे, अवैध रूप से विकसित की गई है। इस कॉलोनी में 10 हजार से अधिक की आबादी रहती है, जिनमें करीब 5 हजार किरायेदार हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन किरायेदारों का कोई सत्यापन नहीं हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सत्यापन के रहने वाले किरायेदारों की वजह से ऐसी कॉलोनियां अपराधियों और आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनती जा रही हैं। यहां बैठकर न सिर्फ अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, बल्कि बड़े अपराधों की साजिश भी रची जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति देश की राजधानी की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है, क्योंकि नोएडा-ग्रेटर नोएडा दिल्ली से सटा हुआ इलाका है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को किरायेदार सत्यापन और अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है।
प्रशासन के सामने अब चुनौती है कि इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का सत्यापन कराया जाए और अवैध निर्माण पर रोक लगाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों को रोका जा सके।



