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French Apartment Water Dispute: फ्रेंच अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन को हाईकोर्ट से राहत

French Apartment Water Dispute: फ्रेंच अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन को हाईकोर्ट से राहत

नोएडा। Allahabad High Court ने ग्रेटर नोएडा स्थित फ्रेंच अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन को बड़ी राहत देते हुए जल कनेक्शन काटने के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने Greater Noida Industrial Development Authority के वरिष्ठ प्रबंधक (जल) को आदेश दिया है कि एसोसिएशन द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र पर आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।

यह आदेश न्यायमूर्ति Mahesh Chandra Tripathi और न्यायमूर्ति Kunal Ravi Singh की खंडपीठ ने सुनाया। मामले में फ्रेंच अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष Prashant Kumar Singh की ओर से याचिका दायर की गई थी।

याचिका में बताया गया कि ग्रेटर नोएडा स्थित फ्रेंच अपार्टमेंट परियोजना में 1088 फ्लैट और 30 दुकानें हैं, जहां हजारों लोग निवास कर रहे हैं। आरोप है कि एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा पानी का बिल जमा नहीं किए जाने के कारण प्राधिकरण ने करीब 88 लाख रुपये बकाया बताते हुए अंतिम नोटिस जारी किया है। इसी के आधार पर जल कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई थी।

एसोसिएशन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि पूर्व में हाईकोर्ट के आदेश के बाद 27 सितंबर 2024 को परियोजना का कब्जा एसोसिएशन को सौंप दिया गया था। इसके बावजूद बिल्डर और प्राधिकरण के बीच पुराने जल बिल को लेकर विवाद बना हुआ है। एसोसिएशन का कहना है कि कब्जा मिलने की तारीख के बाद से वह नियमित रूप से जल बिल जमा करने को तैयार है, लेकिन पुराने बकाये को लेकर विवाद का खामियाजा वहां रहने वाले निवासियों को भुगतना पड़ रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया कि यदि जल कनेक्शन काट दिया जाता है तो हजारों लोगों के सामने गंभीर पेयजल संकट खड़ा हो जाएगा। एसोसिएशन ने अदालत को बताया कि इस संबंध में 30 जनवरी 2026 को ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी को एक प्रार्थना पत्र भी दिया गया था। साथ ही बिल्डर से आईएफएमएस राशि दिलाने की मांग भी उठाई गई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राधिकरण को निर्देश दिया कि एसोसिएशन की मांगों और आवेदन पर निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्णय लिया जाए। इस फैसले को अपार्टमेंट निवासियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि जल आपूर्ति बंद होने की स्थिति में हजारों परिवार प्रभावित हो सकते थे।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में बिल्डर, प्राधिकरण और रेजिडेंट वेलफेयर संस्थाओं के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट के इस आदेश से अब मामले के समाधान की उम्मीद बढ़ गई है और निवासियों को फिलहाल पेयजल संकट से राहत मिल सकती है।

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