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दुर्लभ रोगों के खिलाफ वैश्विक धर्म युद्ध की शुरुआत

-भारत और अमेरिका के विशेषज्ञ मिलकर खोजेंगे दुर्लभ रोगों का इलाज

नई दिल्ली, 5 नवम्बर : दुर्लभ बीमारी के उपचार में असमानताओं को दूर करने के लिए सीमा-पार सहयोग एक तात्कालिक जरूरत है जिसके जरिये प्रभावी दवाओं के विकास और फॉर्मूलों की खोज करने में आसानी होगी। साथ ही दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों को सस्ती दरों पर ऑर्फन ड्रग्स मुहैया कराई जा सकेगी।

दरअसल, एम्स दिल्ली और इंडो-यूएस ऑर्गनाइजेशन फॉर रेयर डिजीज (इंडोयूएसरेयर) इंडो यूएस ब्रिजिंग रेयर समिट 2024) का आयोजन कर रहे हैं जिसमें दुनिया भर के रोगी अधिवक्ता, चिकित्सक, शोधकर्ता और नीति निर्माता एक साथ शिरकत करेंगे। इस दौरान ऑर्फन दवाओं तक मरीज की पहुंच का विस्तार करने, अंतर्राष्ट्रीय नैदानिक परीक्षणों को सुविधाजनक बनाने और नियामक मार्गों को सुव्यवस्थित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। शिखर सम्मेलन का उद्देश्य दुर्लभ बीमारियों में समान स्वास्थ्य सेवा के लिए सस्ती नवाचार प्रक्रिया को प्रेरित करना और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देना है।

एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर और सम्मेलन के आयोजक ने बताया कि दुनियाभर में करीब 10 हजार से अधिक दुर्लभ बीमारियां हैं जो लगभग 40 करोड़ लोगों को प्रभावित करती हैं। इनमें से अनेक बीमारियों की दवाएं व अन्य उपचार उपलब्ध ही नहीं है और जिनके उपचार उपलब्ध हैं, वह बहुत महंगे हैं। हालांकि, भारत सरकार ऐसे दुर्लभ रोगों के उपचार के लिए मरीज को 50 लाख रुपये तक की सहायता देती है लेकिन कई दुर्लभ रोगों के मामलों में वह मरीज की तीन महीने की दवा के लिए भी नाकाफी होते हैं।

इंडोयूएसरेयर के संस्थापक डॉ हर्ष राजसिम्हा ने बताया कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने नई औषधि और नैदानिक परीक्षण नियम, 2019 के नियम 101 को लागू करके किया है। जिससे यह यू.एस., यू.के., ईयू, जापान, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों द्वारा अनुमोदित दुर्लभ रोग दवाओं के लिए स्थानीय नैदानिक परीक्षणों की छूट दी गई है साथ ही दुर्लभ रोगों के लिए नैदानिक परीक्षण करने की अनुमति भी प्रदान की गई है। इससे दुर्लभ रोगों से पीड़ित लोगों को विदेशी दवाइयों के साथ स्वास्थ्य लाभ भी मिल सकेगा।

क्या है ऑर्फन दवाएं ?
ऑर्फन ड्रग्स ऐसी दवाएं हैं जिनका उपयोग दुर्लभ बीमारियों या विकारों के निदान, रोकथाम और उपचार के लिए किया जाता है।वहीं, दुर्लभ रोगों का क्षेत्र जटिल, विषम और निरंतर विकसित हो रहा है जो चिकित्सा एवं वैज्ञानिक ज्ञान की कमी से ग्रस्त है। भारत में अब तक लगभग 450 दुर्लभ बीमारियों का पंजीकरण किया जा चुका है जिनके उपचार की खोज और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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