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Doctor’s Day Special: शरीर के चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी!

Doctor’s Day Special: शरीर के चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी!

नई दिल्ली, 1 जुलाई : बदलती जीवनशैली और अनियमित दिनचर्या के कारण गंभीर बीमारियां अब केवल बढ़ती उम्र तक सीमित नहीं रह गई हैं। पहले जहां हृदय रोग, किडनी फेल होना और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियां बुजुर्गों में अधिक देखने को मिलती थीं, वहीं अब 30 से 40 वर्ष की आयु के युवा भी तेजी से इनकी चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि देर रात तक जागना, तनावपूर्ण जीवन, फास्ट फूड का बढ़ता सेवन, धूम्रपान, प्रदूषण और नियमित स्वास्थ्य जांच की अनदेखी इस समस्या के प्रमुख कारण हैं। हालांकि समय रहते सावधानी और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अधिकांश गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।

डॉक्टर्स डे के अवसर पर एम्स दिल्ली, सफदरजंग अस्पताल, डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सकों ने लोगों से अपने शरीर के शुरुआती चेतावनी संकेतों को गंभीरता से लेने की अपील की। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर किसी भी गंभीर बीमारी से पहले कई संकेत देता है, लेकिन अधिकांश लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही बाद में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। डॉक्टरों ने संदेश दिया कि “बीमारी का इंतजार करने के बजाय सेहत में निवेश करें”, क्योंकि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, रोजाना व्यायाम, तनाव पर नियंत्रण और समय पर डॉक्टर से परामर्श ही लंबे और स्वस्थ जीवन की सबसे प्रभावी कुंजी है।

मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अनुपम प्रकाश ने सलाह दी कि प्रत्येक व्यक्ति को वर्ष में कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, लिवर और किडनी की जांच अवश्य करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन 30 से 45 मिनट तक पैदल चलना, घर का ताजा और संतुलित भोजन करना, पर्याप्त नींद लेना तथा तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवाओं का सेवन करने से भी बचने की सलाह दी।

नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. हिमांशु वर्मा ने बताया कि किडनी की बीमारी अक्सर शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है। इसलिए मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को नियमित रूप से किडनी की जांच करानी चाहिए। उन्होंने पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, नमक का सीमित सेवन करने और पैरों में सूजन, पेशाब में झाग, खून या पेशाब की मात्रा में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी।

पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विजय हड्डा ने कहा कि लगातार दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहना, सांस फूलना, सीने में जकड़न, बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होना या सीढ़ियां चढ़ते समय सांस लेने में तकलीफ होना सामान्य नहीं है। उन्होंने लोगों से धूम्रपान पूरी तरह छोड़ने, प्रदूषण के दौरान मास्क पहनने और अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित मरीजों को अपनी दवाएं नियमित रूप से लेने की सलाह दी। उनका कहना था कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पुनीत अग्रवाल ने बताया कि सीने में दर्द, दर्द का बाएं हाथ या जबड़े तक फैलना, अचानक अत्यधिक पसीना आना, सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होना हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार या इंतजार करने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही हृदय रोगों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। नियमित मेडिकल चेकअप, संतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधि, तनाव पर नियंत्रण और शरीर के चेतावनी संकेतों को समय रहते पहचानना गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। डॉक्टरों का मानना है कि छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर न केवल कई जानलेवा बीमारियों से बचा जा सकता है, बल्कि बेहतर और स्वस्थ जीवन भी जिया जा सकता है।

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