Cyber Crime Training: साइबर ठगी के नए तरीकों से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण, डिजिटल साक्ष्य से क्रिप्टोकरेंसी तक की मिली जानकारी

Cyber Crime Training: साइबर ठगी के नए तरीकों से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण, डिजिटल साक्ष्य से क्रिप्टोकरेंसी तक की मिली जानकारी

नोएडा। साइबर अपराधियों के लगातार बदलते तौर-तरीकों से निपटने और साइबर ठगी के मामलों की जांच को अधिक वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाने के लिए गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने सोमवार को एक दिवसीय साइबर जागरूकता एवं क्षमता संवर्धन कार्यशाला आयोजित की। पुलिसकर्मियों को डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण, तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल और साइबर अपराध की प्रभावी विवेचना से जुड़े विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण दिया गया।

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में आयोजित कार्यशाला का नेतृत्व सहायक पुलिस आयुक्त साइबर विवेक रंजन राय ने किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच करने वाले पुलिसकर्मियों को नई तकनीकों और अपराधियों की बदलती कार्यप्रणाली से परिचित कराना रहा।

कार्यशाला में साइबर क्राइम थाने, जोनल साइबर सेल और आईटी सेल में तैनात पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा वर्ष 2023 बैच के सभी उपनिरीक्षकों और कमिश्नरेट के विभिन्न थानों में स्थापित साइबर हेल्पडेस्क पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षण दिया गया।

साइबर क्राइम मुख्यालय उत्तर प्रदेश द्वारा अनुबंधित साइबर विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधियों की नई कार्यप्रणाली और तकनीकी जांच के तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी समय के साथ नए तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए जांच एजेंसियों के लिए भी लगातार तकनीकी रूप से अपडेट रहना जरूरी है।

प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया। पुलिसकर्मियों को बताया गया कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों में प्राप्त डिजिटल जानकारी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच के दौरान उनकी उपयोगिता बनी रहे।

डिजिटल साक्ष्यों के संकलन और विश्लेषण की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि तकनीकी साक्ष्यों का सही तरीके से विश्लेषण कर साइबर अपराध की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने और आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

कार्यशाला में क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन तकनीक जैसे आधुनिक तकनीकी विषयों पर भी चर्चा की गई। पुलिसकर्मियों को इन तकनीकों से जुड़ी बुनियादी और जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं, ताकि इनसे संबंधित साइबर अपराध सामने आने पर विवेचना को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

इसके साथ ही कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर और इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी आईपीडीआर के विश्लेषण से संबंधित तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। साइबर अपराध की जांच के दौरान इन रिकॉर्ड से प्राप्त जानकारी का प्रभावी इस्तेमाल करने के तरीकों पर चर्चा हुई।

प्रशिक्षण में इस बात पर भी जोर दिया गया कि साइबर अपराध के मामलों में डिजिटल साक्ष्यों का संकलन केवल जांच तक सीमित नहीं है। साक्ष्यों को इस प्रकार सुरक्षित और व्यवस्थित करना जरूरी है कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।

साइबर अपराध की रोकथाम और पीड़ितों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई को भी कार्यशाला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। पुलिसकर्मियों को बताया गया कि साइबर ठगी के मामलों में समय पर कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में शिकायत प्राप्त होते ही उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर जांच शुरू करना आवश्यक है।

थानों में बनाए गए साइबर हेल्पडेस्क पर तैनात पुलिसकर्मियों को शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की जानकारी भी दी गई। इसका उद्देश्य थाना स्तर पर आने वाली साइबर अपराध की शिकायतों को शुरुआती चरण से ही गंभीरता और तकनीकी समझ के साथ संभालना है।

कार्यशाला के दौरान पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीकी उपकरणों और डिजिटल संसाधनों के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई। इससे जांच अधिकारियों को वास्तविक मामलों में तकनीक का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ऑनलाइन भुगतान, सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और इंटरनेट आधारित सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर अपराध की प्रकृति भी तेजी से बदल रही है। अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

ऐसे में साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को तकनीकी रूप से लगातार प्रशिक्षित करना जरूरी है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस बल की तकनीकी दक्षता बढ़ाकर साइबर अपराध की जांच को अधिक वैज्ञानिक, निष्पक्ष और सफल बनाना है।

गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखने की बात कही गई है। इसके माध्यम से साइबर अपराध की बदलती चुनौतियों के अनुरूप पुलिसकर्मियों के तकनीकी ज्ञान और जांच क्षमता को लगातार बेहतर किया जाएगा।

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