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Noida Labour Violence: श्रमिक हिंसा मामले में छह आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज, आकृति चौधरी को तीन मामलों में नहीं मिली राहत

Noida Labour Violence: श्रमिक हिंसा मामले में छह आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज, आकृति चौधरी को तीन मामलों में नहीं मिली राहत

नोएडा। अप्रैल 2026 में नोएडा के अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में हुई श्रमिक हिंसा से जुड़े मामलों में सत्र अदालत ने छह आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज कर दी हैं। प्रमुख आरोपी आकृति चौधरी की चार जमानत अर्जियों में से तीन को अदालत ने निरस्त कर दिया, जबकि एक अन्य मामले में उसे जमानत मिल गई। इसके अलावा आदित्य आनंद चौहान की दो और सत्यम वर्मा, रूपेश राय, सृष्टि गुप्ता तथा हिमांशु ठाकुर की एक-एक मामले में जमानत अर्जी खारिज की गई है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार 13 अप्रैल 2026 को नोएडा के सेक्टर-64, 65, 67, 68 और 69 के अलावा ट्रांसपोर्ट नगर, फेज-1, फेज-2 और फेज-3 क्षेत्र में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर बड़ी संख्या में श्रमिकों का प्रदर्शन हुआ था। आरोप है कि इस दौरान प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया और विभिन्न स्थानों पर उपद्रव की घटनाएं हुईं।

अभियोजन का आरोप है कि श्रमिक संगठनों की आड़ में सुनियोजित तरीके से भीड़ इकट्ठा की गई थी। भीड़ में शामिल कुछ लोगों पर लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर और कथित घातक हथियार लेकर विभिन्न कंपनियों के परिसरों में घुसने का आरोप लगाया गया है।

घटनाओं को लेकर नोएडा के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में मुकदमे दर्ज किए गए थे। जांच के दौरान पुलिस ने कई लोगों की भूमिका का दावा करते हुए उन्हें आरोपी बनाया।

अभियोजन के अनुसार आकृति चौधरी, रूपेश राय, आदित्य आनंद, सृष्टि गुप्ता, हिमांशु ठाकुर, सत्यम वर्मा, मनीषा चौहान, मधुरेश राय, प्रियंबदा शर्मा, प्रेरित लोढ़ा और शिवानी कौल समेत अन्य लोगों ने कथित रूप से व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से मजदूरों को भड़काया था।

अभियोजन का दावा है कि व्हाट्सऐप ग्रुप का इस्तेमाल केवल संपर्क के लिए नहीं, बल्कि श्रमिक आंदोलन की योजना तैयार करने के लिए भी किया गया। इसी आधार पर अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की जमानत का विरोध किया।

आकृति चौधरी की ओर से दाखिल जमानत अर्जियों पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अभियोजन के आरोपों को गलत बताया। बचाव पक्ष ने दावा किया कि आकृति चौधरी को शासन-प्रशासन के दबाव में झूठा फंसाया गया है।

बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष आरोपी की हिरासत की अवधि का भी उल्लेख किया। पक्ष की ओर से कहा गया कि आकृति चौधरी 12 अप्रैल 2026 से जिला कारागार में निरुद्ध है और उसे जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

अदालत ने जमानत अर्जियों पर फैसला सुनाने से पहले केस डायरी और मामले में उपलब्ध सामग्री का अवलोकन किया। न्यायालय ने माना कि आरोपियों के खिलाफ मामला केवल घटनास्थल पर सामान्य उपस्थिति के आरोप तक सीमित नहीं है।

न्यायालय के अनुसार केस डायरी में घटना से पहले ही श्रमिक आंदोलन की योजना बनाए जाने का कथन मौजूद है। इस कारण अदालत ने आरोपियों की कथित भूमिका को मामले की गंभीरता के साथ विचार में लिया।

अदालत ने अपराध की प्रकृति, आरोपियों की कथित भूमिका, केस डायरी में उपलब्ध सामग्री और मामले की गंभीरता को देखते हुए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं माना। इसके बाद संबंधित जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया गया।

आकृति चौधरी ने चार अलग-अलग मामलों में जमानत के लिए आवेदन किया था। इनमें तीन मामलों में उसकी जमानत अर्जियां खारिज कर दी गईं। हालांकि थाना फेज-2 नोएडा में दर्ज एक अन्य मामले में दूसरी अदालत ने उसकी जमानत स्वीकार कर ली है।

सत्र अदालत ने आदित्य आनंद चौहान की दो जमानत अर्जियों को भी खारिज कर दिया। इसके साथ ही सत्यम वर्मा, रूपेश राय, सृष्टि गुप्ता और हिमांशु ठाकुर की एक-एक जमानत अर्जी भी निरस्त कर दी गई।

जिन मामलों में जमानत अर्जियां खारिज हुई हैं, उनमें आरोपियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया संबंधित अदालतों में जारी रहेगी।

अभियोजन पक्ष जहां श्रमिक आंदोलन को पहले से योजनाबद्ध बताते हुए आरोपियों की भूमिका का दावा कर रहा है, वहीं बचाव पक्ष आरोपों का विरोध कर रहा है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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