भारत

सेना ने बख्तरबंद वाहन किया एयरड्रॉप, सैन्य ताकत में हुआ इजाफा 

- सेना ने वायुसेना और डीआरडीओ के सहयोग से आकाश से धरती पर उतारा मैकेनिकल प्लेटफार्म

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (टॉप स्टोरी न्यूज नेटवर्क): स्वदेशी तकनीक से भारी बख्तरबंद वाहन को आकाश से धरती पर सुरक्षित उतारने के साथ ही भारतीय सेना की लड़ाकू क्षमता पहले के मुकाबले और ज्यादा बढ़ गई है। दरअसल, भारतीय सेना ने रक्षा विकास अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) और वायुसेना के सहयोग से राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक बीएमपी की सफल लैंडिंग करने में कामयाबी हासिल की है। इस तकनीक से जहां दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सैन्य साजो सामान तेजी से पहुंचाने में मदद मिल सकेगी। वहीं, पैदल सेना को ‘ कवर ‘ भी दिया जा सकेगा।

भारतीय सेना के मुताबिक डीआरडीओ के एडीआरडीई ने एक ऐसा मैकेनाइज्ड प्लेटफार्म विकसित किया है जिसके माध्यम से दुर्गम पहाड़ी इलाकों, युद्धग्रस्त क्षेत्रों और अन्य अशांत क्षेत्रों में भारी सैन्य वाहनों, युद्धक टैंकों और अन्य भारी हथियारों को आकाश मार्ग से जमीन पर आसानी से उतारा जा सकता है। सेना ने एयर डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई) के साथ मिलकर एक 32 फुट लंबे प्लेटफॉर्म से बीएमपी की रणनीतिक हवाई डिलीवरी के जरिये अपनी क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। इस दौरान वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर परिवहन विमान का उपयोग किया गया।

क्या है बीएमपी?
बीएमपी की फुल फॉर्म बोयेवाया माशिना पेखोटी है जिसका हिंदी रूपांतरण ‘ पैदल सेना का लड़ाकू वाहन ‘ है। यह रूस निर्मित बख्तरबंद वाहन है जिसकी बनावट टैंक जैसी होती है। इसे पैदल सेना से लड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें अधिकतम 10 सैनिक सवार होते हैं। यह गोलाबारी करने वाले युद्धक टैंक को फायर कवर देने के लिए उसके पीछे चलता है। इसके माध्यम से सेना के जवानों को सड़क और पानी के रास्ते युद्ध क्षेत्र तक भेजा जा सकता है। यह दो फायर गन वाला वाहन सीमित सीमा तक परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियारों से भी सुरक्षित होता है।

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