
Cervical cancer India: सर्वाइकल कैंसर रोकने में एम्स बना अग्रणी, महिलाओं के लिए बचाव और जागरूकता अभियान तेज
नई दिल्ली। अगर किसी प्रकार के कैंसर को सबसे प्रभावी तरीके से रोका जा सकता है, तो वह सर्वाइकल कैंसर है। बावजूद इसके यह महिलाओं में बीमारी और मौत का एक बड़ा कारण बना हुआ है। भारत में यह महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। हर साल 1,27,526 नए मामले सामने आते हैं और 79,906 महिलाओं की मौत इस कैंसर से होती है। इसका मतलब है कि हर आठ मिनट में एक महिला सर्वाइकल कैंसर से मर जाती है।
एम्स दिल्ली के प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी विभाग की डॉ. पल्लवी शुक्ला के अनुसार, एम्स सर्वाइकल कैंसर के कारणों, प्राकृतिक इतिहास और रोकथाम के विकल्पों पर व्यापक जागरूकता फैला रहा है। इसमें प्राथमिक रोकथाम के लिए एचपीवी वैक्सीनेशन और माध्यमिक रोकथाम के लिए एचपीवी टेस्टिंग, पैप स्मीयर और वीआईए सहित कई स्क्रीनिंग टेस्ट शामिल हैं। डॉ. शुक्ला ने कहा कि मान्य एचपीवी टेस्ट जीवन में कम से कम दो बार किया जाना चाहिए – एक 35 साल की उम्र में और दूसरा 45 साल की उम्र तक – क्योंकि यह कैंसर का जल्दी पता लगाने का सबसे संवेदनशील और सटीक तरीका है।
सर्वाइकल कैंसर हाई-रिस्क ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचआर-एचपीवी) के लगातार संक्रमण के कारण होता है। यह एक आम संक्रमण है जिसे सामान्यतः शरीर का इम्यून सिस्टम खत्म कर देता है, लेकिन 10% से कम महिलाओं में यह बना रह सकता है। इससे प्री-कैंसर और कैंसर का खतरा रहता है। जोखिम अधिक होने वाले सह-कारकों में कम उम्र में शादी और पहली प्रेग्नेंसी, कई बच्चों का जन्म, रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इन्फेक्शन जैसे क्लैमाइडिया, गोनोरिया और हर्पीस, धूम्रपान आदि शामिल हैं। यह संक्रमण 10-15 साल में विकसित होता है।
उन महिलाओं में जो जीवनभर इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेती हैं, जैसे एचआईवी पॉजिटिव और ऑर्गन ट्रांसप्लांट की मरीजें, सर्वाइकल कैंसर का खतरा छह गुना अधिक होता है। प्रारंभिक चरण में अक्सर लक्षण नहीं दिखते। आम लक्षणों में लंबे समय तक बदबूदार या खून वाला वेजाइनल डिस्चार्ज, पीरियड्स के बीच या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग, या अस्वस्थ सर्विक्स शामिल हैं। अंतिम चरण में पैरों तक फैलने वाला पीठ दर्द, भूख न लगना और यूरिन या ब्लैडर पर कंट्रोल खोने जैसे लक्षण हो सकते हैं। शुरुआती स्टेज में पहचान होने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है।
सर्वाइकल कैंसर में 10-15 साल का लंबा प्रीकैंसरस चरण होता है, जिससे स्क्रीनिंग के जरिए इसे जल्दी पकड़ा जा सकता है। इस दौरान एब्लेशन जैसी सरल आउटपेशेंट प्रक्रियाओं से इलाज संभव है। एम्स का प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी क्लीनिक मुंह, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग कर रहा है। रोटरी क्लब और द कैंसर फाउंडेशन के सहयोग से 9-14 साल की कमजोर लड़कियों को एचपीवी वैक्सीनेशन दिया जा रहा है, जो सर्वाइकल कैंसर रोकने के लिए सबसे प्रभावी उम्र समूह है।
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