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Bangladesh Protest: बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद उबाल, इस्तीफे की मांग के बीच कड़ी सुरक्षा में हुआ अंतिम संस्कार

Bangladesh Protest: बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद उबाल, इस्तीफे की मांग के बीच कड़ी सुरक्षा में हुआ अंतिम संस्कार

ढाका। बांग्लादेश में जुलाई 2024 के विद्रोह से जुड़े प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद देश का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। शनिवार को लगातार तीसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रहे, वहीं राजधानी ढाका में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हादी का अंतिम संस्कार किया गया। हादी की मौत को लेकर प्रदर्शनकारी गृह मामलों के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) मोहम्मद जहांगीर आलम चौधरी के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि हत्या के एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बावजूद दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

20 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय संसद के पास मानिक मिया एवेन्यू में हादी की जनाज़े की नमाज़ अदा की गई, जिसमें देशभर से हजारों लोग शामिल हुए। इस दौरान ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने कड़े इंतजाम किए थे और भीड़ नियंत्रण के लिए लगभग एक हजार बॉडी-वियर कैमरों के साथ बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए। जनाज़े के बाद हादी को दोपहर करीब 3 बजकर 48 मिनट पर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग “इंकलाब जिंदाबाद” और “दिल्ली ना ढाका–ढाका, ढाका” जैसे नारे लगाते हुए शाहबाग चौराहे की ओर बढ़े। कुछ प्रदर्शनकारियों ने शाहबाग का नाम बदलकर “हादी चट्टार” रखने की मांग भी की।

जनाज़े से पहले मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस भी संसद के दक्षिणी प्लाज़ा पहुंचे। उन्होंने कहा कि शरीफ उस्मान हादी को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा और राष्ट्र के लिए उनके द्वारा छोड़ी गई शिक्षाओं के माध्यम से वे हमेशा जीवित रहेंगे। यूनुस ने कहा कि हादी चुनाव में भाग लेना चाहते थे और चुनाव लड़ने की इच्छा जताकर उन्होंने यह भी सिखाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कैसे स्वीकार किया जाना चाहिए।

हादी द्वारा सह-स्थापित सामाजिक-सांस्कृतिक समूह इंकलाब मोनचा के सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने गृह सलाहकार के इस्तीफे के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। राजनीतिक दलों और मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि देश में जारी हिंसा, आगजनी और अस्थिरता का फायदा उठाकर फरवरी 2026 में प्रस्तावित राष्ट्रीय चुनावों को बाधित किया जा सकता है।

हालांकि कुछ इलाकों में हालात सामान्य होने के संकेत मिले हैं। हाल ही में आगजनी का शिकार हुए प्रोथोम आलो और द डेली स्टार के कार्यालय शनिवार को दोबारा खुल गए, लेकिन मीडिया और सांस्कृतिक संस्थानों पर हुए हमलों को लेकर चिंता बनी हुई है। प्रमुख सांस्कृतिक संगठन उदिची शिल्पी गोष्ठी ने अपने केंद्रीय कार्यालय पर हुए आगजनी हमले के लिए अंतरिम सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि सरकार जुलाई विद्रोह की भावना से भटक गई है। संगठन का कहना है कि इस आग में 55 वर्षों के सांस्कृतिक अभिलेखागार नष्ट हो गए, जो बांग्लादेश के प्रगतिशील सांस्कृतिक आंदोलन और 1971 के मुक्ति संग्राम की भावना पर सीधा हमला है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने शरीफ उस्मान हादी की हत्या और उसके बाद हुई भीड़ हिंसा की त्वरित, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। संगठन ने मीडिया संस्थानों पर हमलों और पत्रकारों के उत्पीड़न की निंदा की, साथ ही मयमनसिंह के भालुका उपज़िला में ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर मारे गए हिंदू कपड़ा श्रमिक दीपू चंद्र दास की हत्या पर भी गहरी चिंता जताई। बांग्लादेशी अधिकारियों ने इस मामले में सात संदिग्धों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

देश में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या 12 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रीय चुनाव समय पर कराए जा सकेंगे। बीएनपी स्थायी समिति के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने चेतावनी दी कि कुछ ताकतें इस हत्या का राजनीतिक लाभ उठाकर चुनावों में देरी कराने की साजिश कर सकती हैं और जनता से सतर्क रहने की अपील की।

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