AIIMS Delhi: 209 किलो वजन वाले मरीज ने सुपर-सुपर ओबेसिटी को दी मात, एम्स के डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

AIIMS Delhi: 209 किलो वजन वाले मरीज ने सुपर-सुपर ओबेसिटी को दी मात, एम्स के डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण चिकित्सा मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 209 किलोग्राम वजन वाले मरीज को नई जिंदगी दी है। 32 वर्षीय विवेक गंभीर मोटापे, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और सांस लेने की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। उनकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें ट्रेकियोस्टॉमी और सीपीएपी मशीन के सहारे सांस लेनी पड़ रही थी। लेकिन 32 दिनों की विशेष तैयारी और सफल बैरिएट्रिक सर्जरी के बाद अब वह बिना मशीन के स्वयं सांस ले रहे हैं और सामान्य रूप से चल-फिर भी पा रहे हैं।
एम्स के सर्जन डॉ. मंजूनाथ मारुति पोल ने बताया कि मरीज का बीएमआई 74 था और वह गंभीर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित था। 19 जून को उसकी ट्रेकियोस्टॉमी करनी पड़ी थी, जिसमें गर्दन के सामने एक छोटा छेद बनाकर श्वास नली में ट्यूब डाली गई ताकि वह सांस ले सके। इसके बावजूद उसे लंबे समय तक ऑक्सीजन और सीपीएपी मशीन का सहारा लेना पड़ रहा था।
डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की सीधे सर्जरी करना अत्यधिक जोखिम भरा था। इसलिए पहले 32 दिनों तक एनेस्थीसिया, संक्रमण नियंत्रण, फिजिशियन और डाइट विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने उसकी विशेष तैयारी की। इस दौरान वेरी लो कैलोरी डाइट (VLCD) और अन्य उपचारों की मदद से उसका वजन 209 किलोग्राम से घटकर 172 किलोग्राम कर दिया गया। पेट का घेरा भी 198 सेंटीमीटर से घटकर 178 सेंटीमीटर हो गया, जिससे सुरक्षित तरीके से ऑपरेशन करना संभव हुआ।
24 जुलाई को विशेषज्ञों की टीम ने सफलतापूर्वक वन एनास्टोमोसिस गैस्ट्रिक बाईपास (OAGB) सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत तेजी से सुधरी और उसे सीपीएपी मशीन से हटा दिया गया। डॉक्टरों को उम्मीद है कि जल्द ही उसकी ट्रेकियोस्टॉमी भी हटाई जा सकेगी।
करीब डेढ़ महीने तक चले इलाज के बाद 6 अगस्त को मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डिस्चार्ज के समय उसका वजन 160 किलोग्राम रह गया था, यानी अस्पताल में इलाज के दौरान उसका कुल 49 किलोग्राम वजन कम हुआ। डॉक्टरों का कहना है कि यह मामला बताता है कि अत्यधिक मोटापे और उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों का भी सही समय पर विशेषज्ञ उपचार, संतुलित आहार और बहु-विभागीय चिकित्सा से सफल इलाज संभव है।





