Agra: सीता नगर में 5 साल से नाला-पुलिया संकट, गंदे पानी से त्रस्त लोगों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

Agra: सीता नगर में 5 साल से नाला-पुलिया संकट, गंदे पानी से त्रस्त लोगों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
रिपोर्ट: आकाश जैन
एक ओर आगरा को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वार्ड-50 का सीता नगर इलाके की जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां हालात इतने बदतर हैं कि बिना बारिश के भी नालों का गंदा पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। बदबू, जलभराव और मच्छरों के कारण स्थानीय निवासियों का जीवन दूभर हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों से वे लगातार पार्षद और नगर निगम के अधिकारियों को शिकायतें दे रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया। हर बार आश्वासन दिया जाता है कि प्रस्ताव भेज दिया गया है या जल्द काम शुरू होगा, मगर धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखती।
इलाके में कई घरों की हालत ऐसी है कि रसोई और कमरों तक गंदा पानी पहुंच जाता है। परिवारों को रोजाना बाल्टियों से पानी निकालना पड़ता है। बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों की आशंका से लोग भयभीत हैं। क्षेत्रीय निवासी प्रेम सिंह कुशवाह का कहना है कि बिना बारिश के भी घरों में नाला उफन कर भर जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। वहीं राकेश कुशवाह ने बताया कि इलाके में बनी पुलिया का डिजाइन ही गलत है। उनके अनुसार नाली छोटी और पुलिया ऊंची बना दी गई है, जिससे पानी की निकासी रुक जाती है और पूरा मोहल्ला तालाब में बदल जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी मौके पर आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और लौट जाते हैं। जब समाधान की मांग की जाती है तो जवाब मिलता है कि सफाई के लिए गैंग उपलब्ध नहीं है या ऊपर से स्वीकृति का इंतजार है। इस कथित जवाब से लोगों में भारी नाराजगी है। मोहल्ले में बदबू के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया है। मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई विशेष कार्रवाई नजर नहीं आ रही। लोगों का सवाल है कि क्या वे सिर्फ चुनाव के समय याद किए जाते हैं?
बढ़ते आक्रोश के बीच क्षेत्रवासियों ने “विकास नहीं तो वोट नहीं” का नारा दिया है। पार्षद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ और चेतावनी दी गई कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आगामी चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्मार्ट सिटी का सपना सिर्फ पोस्टरों और भाषणों तक सीमित रहेगा, या फिर सीता नगर जैसे इलाकों तक भी बुनियादी सुविधाएं पहुंचेंगी। स्थानीय लोग प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।





