Medical Technology: एम्स ने दिखाई भविष्य की चिकित्सा की तस्वीर, 1,000 रोबोटिक सर्जरी से अंटार्कटिका तक टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को आम मरीजों की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। एम्स निदेशक डॉ. निखिल टंडन के नेतृत्व में संस्थान ने ऐसी कई तकनीकों को विकसित और लागू किया है, जिनका उद्देश्य इलाज को अधिक सटीक, सुरक्षित और किफायती बनाना है। मरीजों की बेहतर देखभाल को प्राथमिकता देते हुए एम्स ने चिकित्सा विज्ञान में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
एम्स ने 1,000 रोबोटिक सर्जरी पूरी करने का महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। इसके साथ ही संस्थान ने रोबोट की सहायता से देश का पहला किडनी ट्रांसप्लांट भी सफलतापूर्वक किया है। रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल से जटिल सर्जरी में डॉक्टरों को अधिक सटीकता के साथ काम करने में मदद मिलती है। इससे आधुनिक सर्जिकल सुविधाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एम्स की क्षमता और मजबूत हुई है।
गंभीर मरीजों के इलाज के लिए एम्स ने देश की पहली पोर्टेबल बेडसाइड एमआरआई मशीन भी शुरू की है। इस तकनीक की मदद से मरीज को जांच के लिए आईसीयू जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से दूसरी जगह ले जाने की जरूरत कम हो सकती है। मरीज के बिस्तर के पास ही हाई-प्रिसिजन ब्रेन इमेजिंग की सुविधा मिलने से गंभीर स्थिति वाले मरीजों की जांच अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से की जा सकेगी।
एम्स का जोर केवल अत्याधुनिक तकनीक पर नहीं, बल्कि इलाज को कम खर्च में उपलब्ध कराने पर भी है। संस्थान के विशेषज्ञों ने करीब 100 रुपये की लागत वाली सर्वाइकल कैंसर टेस्ट किट विकसित की है। इसका उद्देश्य कम लागत में अधिक से अधिक महिलाओं तक कैंसर की जांच की सुविधा पहुंचाना है। शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से समय पर उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एम्स में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी काम कर रहा है। यहां रेडियोलॉजी, कैंसर के सटीक इलाज और अन्य जटिल चिकित्सकीय जरूरतों में एआई तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार तकनीक का बेहतर इस्तेमाल जांच और उपचार की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।
एम्स ने टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने दुनिया की सबसे लंबी दूरी वाली टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड सुविधा का प्रदर्शन किया। इसके तहत नई दिल्ली में बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अंटार्कटिका में मौजूद मरीज तक रियल टाइम में चिकित्सा विशेषज्ञता पहुंचाई।
यह तकनीक भविष्य में उन दूरदराज और दुर्गम इलाकों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता कम है। टेली-रोबोटिक तकनीक के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टर दूर बैठे मरीज की जांच में सहयोग कर सकते हैं और जरूरत के अनुसार तत्काल चिकित्सकीय मार्गदर्शन उपलब्ध करा सकते हैं।
मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी एम्स ने विशेष व्यवस्था की है। संस्थान में पेशेंट सेफ्टी एंड क्वालिटी सेल की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य इलाज के दौरान होने वाली ऐसी गलतियों और नुकसान को कम करना है, जिन्हें उचित व्यवस्था, निगरानी और प्रक्रियाओं के जरिए रोका जा सकता है। एम्स ने ऐसी घटनाओं को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा है।
इसके अलावा मेडिकल इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप केंद्र के माध्यम से देश में विकसित हो रही स्वास्थ्य तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में नए विचारों, तकनीकों और समाधानों को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें मरीजों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाना है।
एम्स की इन पहलों से स्पष्ट है कि संस्थान चिकित्सा के भविष्य को केवल अत्याधुनिक मशीनों और तकनीक से नहीं, बल्कि मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़कर देख रहा है। रोबोटिक सर्जरी, पोर्टेबल एमआरआई, कम लागत वाली कैंसर जांच, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड जैसी तकनीकों के जरिए इलाज को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाने के साथ उसकी पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
एम्स का संदेश है कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में तकनीक के साथ मानवीय संवेदना भी जरूरी है। संस्थान का लक्ष्य केवल नई मशीनें और सर्जरी विकसित करना नहीं, बल्कि ऐसा स्वास्थ्य तंत्र तैयार करना है जिसमें देश के हर नागरिक को बेहतर, सुरक्षित, सटीक और किफायती इलाज उपलब्ध हो सके।


