Labour Violence Case: श्रमिक हिंसा मामले में दो आरोपियों को जमानत, अन्य मामलों के कारण जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे
नोएडा। श्रमिक हिंसा से जुड़े अलग-अलग मामलों में जिला न्यायालय ने सत्यम वर्मा और मनीषा चौहान को जमानत दे दी है। हालांकि, दोनों के खिलाफ अन्य मामले भी दर्ज हैं, इसलिए अदालत से जमानत मिलने के बावजूद फिलहाल उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ नहीं हुआ है। न्यायालय ने अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और परिस्थितियों को जमानत से इनकार करने के लिए पर्याप्त नहीं माना।
फेज-2 थाना क्षेत्र स्थित रिचा ग्लोबल कंपनी में अप्रैल में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान बलवा, तोड़फोड़ और आगजनी की साजिश के आरोप में सत्यम वर्मा को जेल भेजा गया था। मामले के अनुसार, 10 अप्रैल को सैकड़ों कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर कंपनी के गेट पर प्रदर्शन किया था। आरोप है कि आंदोलन के दौरान कंपनी में मौजूद लोगों को बंधक बनाने, तोड़फोड़ और आगजनी की धमकी दी गई थी।
पुलिस ने आरोप लगाया था कि 11 और 13 अप्रैल को भी बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए, कंपनी में प्रवेश रोकने की कोशिश की गई और भंगेल फ्लाईओवर के पास जाम लगाया गया। आंदोलन को संगठित और भड़काने के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया था।
सत्यम वर्मा की ओर से बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि मामले की एफआईआर घटना के करीब 10 दिन बाद दर्ज की गई थी और उसमें आरोपी का नाम नहीं था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जिस व्हाट्सऐप नंबर को पुलिस मामले से जोड़ रही है, वह सत्यम का नहीं है।
अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए माना कि बैंक खाते में धनराशि प्राप्त होना मात्र इस बात का पर्याप्त प्रमाण नहीं है कि उस धनराशि का इस्तेमाल श्रमिक आंदोलन में किया गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सत्यम वर्मा को जमानत प्रदान कर दी।
मनीषा चौहान को भी मिली राहत
फेज-3 कोतवाली में दर्ज एक अन्य मामले में मनीषा चौहान पर 13 अप्रैल को हुए उग्र श्रमिक आंदोलन के दौरान कई कंपनियों में तोड़फोड़ और नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। अभियोजन के अनुसार, करीब 100 से 200 उपद्रवी श्रमिक लाठी-डंडे, घातक हथियार और ईंट-पत्थर लेकर सड़कों पर उतर आए थे।
आरोप था कि सेक्टर-64, 65, 67, 68 और 69 में यातायात बाधित किया गया तथा कई कंपनियों में घुसकर सुरक्षा गेट, सीसीटीवी कैमरों, कांच और कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई।
बचाव पक्ष ने अदालत के सामने महत्वपूर्ण तथ्य रखा कि जिस घटना को लेकर मनीषा चौहान पर आरोप लगाए गए, उस समय वह पहले से ही जेल में बंद थीं। अधिवक्ता के अनुसार, मनीषा को 11 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था और 12 अप्रैल को जेल भेज दिया गया था। ऐसे में 13 अप्रैल की घटना में उनकी मौजूदगी पर सवाल उठाया गया।
अदालत ने इस तथ्य समेत मामले की अन्य परिस्थितियों पर विचार करने के बाद मनीषा चौहान को भी जमानत दे दी। हालांकि, अन्य मामलों में हिरासत के कारण दोनों आरोपियों को तत्काल जेल से रिहाई नहीं मिल सकेगी।



