Bulandshahar News (अवनीश त्यागी) : गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और जैविक खेती से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार अब बुलंदशहर में चल रहे गोमूत्र डेरी मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी कर रही है। बुलंदशहर में किसान उत्पादक संगठन एफपीओ द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया यह मॉडल अब अन्य जिलों में भी अपनाया जाएगा।

बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसैना गांव में डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में एफपीओ ने यह पहल शुरू की है। इसके तहत आसपास के 15 गांवों को जोड़ा गया है। सामान्य डेरी की तर्ज पर गांवों में 200 लीटर क्षमता के टैंक लगाकर गोमूत्र संग्रहण केंद्र बनाए गए हैं। यहां गोमूत्र 10 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। वर्तमान में इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 500 लीटर गोमूत्र एकत्र किया जा रहा है।
इस काम में करीब 300 स्थानीय महिलाओं को जोड़ा गया है। गोमूत्र एकत्र करने में सहयोग करने वाली महिलाओं को प्रति लीटर दो रुपये का कमीशन भी दिया जा रहा है। एफपीओ द्वारा एकत्रित गोमूत्र में जड़ी-बूटी मिलाकर कीट नियंत्रक और फसल उत्पादन बढ़ाने वाली दवाएं तैयार की जा रही हैं। इन उत्पादों को समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि बुलंदशहर के इस मॉडल के अनुभवों के आधार पर प्रदेश भर में इसका विस्तार किया जाएगा। इसके लिए एफपीओ और अन्य संगठनों को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि गांव-गांव में गोमूत्र संग्रह केंद्रों का नेटवर्क विकसित हो सके। आगे चलकर गोमूत्र की कीमत को 20 रुपये प्रति लीटर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
जैविक खेती के विशेषज्ञ और पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त भारत भूषण त्यागी ने कहा कि गोमूत्र से तैयार कीटनाशकों के फसलों पर बहुत अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। इससे न केवल गौ संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों की आय और महिलाओं के रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।



