Hepatitis: 2030 तक हेपेटाइटिस खत्म करने का संकल्प, जांच-टीकाकरण पर जोर

Hepatitis: 2030 तक हेपेटाइटिस खत्म करने का संकल्प, जांच-टीकाकरण पर जोर
नई दिल्ली, 28 जुलाई। वायरल हेपेटाइटिस आज भी दुनिया के सामने गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। शुरुआती चरण में अधिकांश मरीजों में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते, जिसके कारण बीमारी की पहचान देर से होती है। समय पर जांच और उपचार नहीं मिलने पर यह लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। ऐसे में हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण, नियमित स्क्रीनिंग, सुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाएं और प्रभावी उपचार बीमारी पर नियंत्रण के महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
इसी संदेश के साथ यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (यूसीएमएस) और गुरु तेग बहादुर अस्पताल में मंगलवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस-2026 पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्राचार्य डॉ. धीरज शाह ने किया।
कार्यक्रम में डॉ. कुलदीप कुमार ने कहा कि वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जन-जागरूकता बढ़ाना, समय पर स्क्रीनिंग कराना, टीकाकरण को बढ़ावा देना और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।
इस अवसर पर डॉ. मनीष नारंग, डॉ. प्रगति छाबड़ा, डॉ. नीलिमा गुप्ता और डॉ. श्रुति श्रीवास्तव सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।
हेपेटाइटिस-सी का इलाज संभव
मुख्य वक्ता आईएलबीएस की हेपेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. प्रो. सीमा आलम ने बताया कि आधुनिक दवाओं की मदद से हेपेटाइटिस-सी का पूर्ण इलाज संभव है। वहीं हेपेटाइटिस-बी को प्रभावी उपचार के माध्यम से नियंत्रित कर गंभीर जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है।
उन्होंने सार्वभौमिक हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण, उच्च जोखिम वाले लोगों की नियमित जांच, सुरक्षित रक्त आधान और सुरक्षित इंजेक्शन पद्धतियों पर जोर दिया। विशेषज्ञ ने बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करने की जरूरत भी बताई, ताकि लोग जांच और उपचार के लिए आगे आने में संकोच न करें।
संक्रमण रोकने के उपायों पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में माता से शिशु में हेपेटाइटिस संक्रमण के प्रसार को रोकने, स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण नियंत्रण और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के जरिए उपलब्ध उपचार के बारे में जानकारी दी गई।
एमबीबीएस विद्यार्थियों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों, स्वास्थ्य कर्मियों और आम नागरिकों ने कार्यक्रम में भाग लिया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से बीमारी, बचाव और उपचार से जुड़े सवाल पूछे तथा हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।





