Head Neck Cancer:  भारत में सिर-गर्दन कैंसर का बढ़ता खतरा, समय पर जांच से 80-90% मामलों में इलाज संभव

Head Neck Cancer:  भारत में सिर-गर्दन कैंसर का बढ़ता खतरा, समय पर जांच से 80-90% मामलों में इलाज संभव

नई दिल्ली, 28 जुलाई। भारत तेजी से सिर और गर्दन के कैंसर का बड़ा बोझ झेलने वाले देशों में शामिल हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में हर साल सामने आने वाले करीब 9 लाख नए मामलों में लगभग एक-तिहाई यानी करीब 2.8 लाख मामले भारत में दर्ज होते हैं। विश्व सिर एवं गर्दन कैंसर दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने लोगों से बीमारी के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करने और समय रहते जांच कराने की अपील की।

विशेषज्ञों का कहना है कि सिर और गर्दन के कैंसर के प्रमुख कारणों में तंबाकू और शराब का सेवन शामिल है, लेकिन बीमारी का खतरा केवल इन्हीं कारणों तक सीमित नहीं है। खराब ओरल हाइजीन, एचपीवी संक्रमण, गलत फिटिंग वाले डेन्चर, लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहना और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली भी जोखिम को बढ़ा सकती है।

चिकित्सकों के अनुसार इस कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती इसका देर से पता चलना है। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान हो जाने पर 80 से 90 प्रतिशत तक मामलों में सफल उपचार संभव हो सकता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण बड़ी संख्या में मरीज बीमारी के एडवांस स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग की रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता गोयल ने कहा कि यह धारणा सही नहीं है कि सिर और गर्दन का कैंसर केवल धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों को ही होता है। उन्होंने लोगों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि यदि मुंह का कोई छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक नहीं हो रहा है, आवाज में लगातार बदलाव बना हुआ है, निगलने में परेशानी हो रही है, मुंह से रक्तस्राव हो रहा है, मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखाई दे रहे हैं अथवा गर्दन में गांठ महसूस हो रही है तो तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।

डॉ. गोयल के मुताबिक समय पर बीमारी का पता लगने से केवल इलाज की सफलता की संभावना ही नहीं बढ़ती, बल्कि मरीज की बोलने, भोजन निगलने और चेहरे की सामान्य कार्यक्षमता को भी बचाने में मदद मिलती है। सिर और गर्दन के कैंसर के इलाज में कई विशेषज्ञों की संयुक्त भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने कहा कि ऑन्कोलॉजिस्ट, सर्जन, डेंटिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट और रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय से मरीज के उपचार और रिकवरी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। कैंसर का इलाज केवल बीमारी को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपचार के बाद मरीज की सामान्य जीवनशैली और कार्यक्षमता को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

इस अवसर पर फोर्टिस हॉस्पिटल में 100 से अधिक मरीजों, कैंसर सर्वाइवर्स, केयर गिवर्स और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान बीमारी की रोकथाम, शुरुआती पहचान, उपचार और कैंसर के बाद सामान्य जीवन में लौटने को लेकर जागरूकता पर जोर दिया गया।

फैसिलिटी डायरेक्टर नवीन शर्मा ने कहा कि सिर और गर्दन के कैंसर के खिलाफ जागरूकता और समय पर स्क्रीनिंग सबसे प्रभावी हथियार हैं। उन्होंने लोगों से शरीर में लंबे समय तक बने रहने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करने और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।

विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू और शराब से दूरी, बेहतर मौखिक स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच और संदिग्ध लक्षणों पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श के जरिए बीमारी के जोखिम को कम किया जा सकता है। खासतौर पर मुंह में लंबे समय तक रहने वाले छाले, धब्बे, गांठ या निगलने और बोलने में बदलाव को सामान्य समस्या मानकर टालना गंभीर साबित हो सकता है।

भारत में सिर और गर्दन के कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए विशेषज्ञों ने सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने, शुरुआती स्क्रीनिंग को प्रोत्साहित करने और मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

 

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