Himachal Pradesh: मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र से मुफ्त बिजली रॉयल्टी बढ़ाने और लंबित ऊर्जा बकाया जारी करने का किया आग्रह

Himachal Pradesh: मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र से मुफ्त बिजली रॉयल्टी बढ़ाने और लंबित ऊर्जा बकाया जारी करने का किया आग्रह
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास और शहरी कार्य मंत्री Manohar Lal Khattar से मुलाकात कर राज्य से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा संचालित जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की निःशुल्क बिजली रॉयल्टी बढ़ाने और लंबित ऊर्जा बकाया के भुगतान में तेजी लाने का अनुरोध किया।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन केंद्रीय जलविद्युत परियोजनाओं ने अपनी प्रारंभिक 12 वर्ष की अवधि पूरी कर ली है, उनमें राज्य को मिलने वाली सामान्य 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी के अतिरिक्त हिस्सेदारी बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से 180 मेगावाट की Baira-Siul Hydroelectric Project का मुद्दा उठाते हुए कहा कि परियोजना के संचालन के 44 वर्ष पूरे हो चुके हैं, इसलिए इसमें राज्य की निःशुल्क बिजली हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जाए।
मुख्यमंत्री ने Bhakra Beas Management Board परियोजनाओं से संबंधित ऊर्जा बकाया का मुद्दा भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान हिमाचल प्रदेश के हजारों लोगों को विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभावों का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद राज्य को मिलने वाले ऊर्जा बकाया का भुगतान लंबे समय से लंबित है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पंजाब और हरियाणा की सहमति लेकर 31 अक्टूबर 2011 तक के 13,066 मिलियन यूनिट ऊर्जा बकाया तथा उसके बाद 6 प्रतिशत ब्याज सहित राज्य को भुगतान सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री के अनुसार यदि इस बकाया का भुगतान नकद रूप में किया जाता है तो वर्तमान गणना के अनुसार इसकी अनुमानित राशि करीब 7,784 करोड़ रुपये बैठती है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने Shanan Hydroelectric Project का मुद्दा भी उठाया और इस परियोजना पर हिमाचल प्रदेश के वैध अधिकार का पक्ष रखा। उन्होंने राज्य के विकास से जुड़ी अन्य महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर भी चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कांगड़ा में प्रस्तावित ‘एयरो सिटी’ और ‘हिम चंडीगढ़’ परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की मांग की। उनका कहना था कि इन परियोजनाओं से सुनियोजित शहरीकरण, निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार 24 शहरी स्थानीय निकायों में ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत 1,179 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित कर रही है, जिनमें से 660 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले चरण में केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी हैं। इसके अलावा ‘क्लीन हिली एंड हिमालयन सिटीज इनिशिएटिव’ के अंतर्गत स्वच्छता और कचरा प्रबंधन कार्यों के लिए 12.33 करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध भी किया गया। मुख्यमंत्री ने अमृत योजना के तहत पूर्व स्वीकृत परियोजनाओं के लिए 64.45 करोड़ रुपये की शेष राशि जारी करने तथा अमृत मित्रा योजना के अंतर्गत 14 शहरी स्थानीय निकायों में प्रस्तावित 43 परियोजनाओं को मंजूरी देने की मांग भी रखी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने शहरी स्थानीय निकायों में क्यूआर-आधारित डिजिटल डोर प्लेट प्रणाली के दूसरे चरण के सफल क्रियान्वयन के लिए आगामी पांच वर्षों में 18 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का भी अनुरोध किया। उनका कहना था कि इससे प्रत्येक संपत्ति को विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान करने में मदद मिलेगी और शहरी प्रशासन को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया जा सकेगा।
बैठक में मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह तथा ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति भी उपस्थित रहे।




