Yoga Benefits: बांझपन, अवसाद और गठिया जैसी बीमारियों के उपचार में योग बना नई उम्मीद, शोधों में मिले उत्साहजनक परिणाम

Yoga Benefits: बांझपन, अवसाद और गठिया जैसी बीमारियों के उपचार में योग बना नई उम्मीद, शोधों में मिले उत्साहजनक परिणाम

नई दिल्ली, 8 जून। योग को लंबे समय से शारीरिक फिटनेस और मानसिक संतुलन बनाए रखने का प्रभावी माध्यम माना जाता रहा है, लेकिन अब वैज्ञानिक शोधों से यह संकेत मिल रहे हैं कि योग कई जटिल और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में भी महत्वपूर्ण सहायक भूमिका निभा सकता है। हाल के अध्ययनों में पाया गया है कि योग पुरुषों की प्रजनन क्षमता बढ़ाने, बार-बार गर्भपात की समस्या से जुड़े जोखिम कारकों को कम करने, अवसाद से राहत दिलाने और गठिया जैसी बीमारियों के उपचार को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, योग शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित कर स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसी दिशा में किए गए एक महत्वपूर्ण अध्ययन में उन 30 पुरुषों को शामिल किया गया जिनकी पत्नियों का गर्भ 20 सप्ताह से पहले तीन या उससे अधिक बार गिर चुका था। अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों को 21 दिनों तक नियमित रूप से योग और ध्यान का अभ्यास कराया गया। इसके बाद किए गए परीक्षणों में पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता, डीएनए और आरएनए की स्थिति तथा प्रोग्रेसिव मोटिलिटी में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सभी कारक सफल गर्भधारण और स्वस्थ प्रजनन क्षमता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। एम्स, नई दिल्ली के एनाटॉमी विभाग की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा के अनुसार, योग का प्रभाव केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य और सूजन संबंधी रोगों में भी सकारात्मक परिणाम दे रहा है। उन्होंने बताया कि आनुवांशिक या जीवनशैली से जुड़े कारणों से उत्पन्न अवसाद से पीड़ित मरीजों को सूर्य नमस्कार, शवासन, पवनमुक्तासन, वक्रासन, ध्यान और शांति मंत्र जैसे योग अभ्यास कराए गए। नियमित अभ्यास के बाद मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव स्तर और भावनात्मक संतुलन में सुधार दर्ज किया गया। एक अन्य अध्ययन में एम्स के एनाटॉमी और मनोचिकित्सा विभागों ने 160 अवसादग्रस्त मरीजों पर 12 सप्ताह तक शोध किया। अध्ययन के दौरान एक समूह को केवल दवाएं दी गईं, जबकि दूसरे समूह को दवाओं के साथ नियमित योग अभ्यास भी कराया गया। परिणामों में पाया गया कि केवल दवा लेने वाले मरीजों में लगभग 29 प्रतिशत सुधार हुआ, जबकि दवा और योग दोनों अपनाने वाले मरीजों में करीब 60 प्रतिशत तक सुधार देखा गया। यह अंतर दर्शाता है कि योग उपचार की प्रभावशीलता को काफी हद तक बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग को किसी भी बीमारी के लिए दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन यह उपचार प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने वाला एक सशक्त पूरक माध्यम है। नियमित योग अभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ योग को जोड़कर कई जटिल बीमारियों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

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