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Heart Attack Risk: तोंद निकली है तो बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा, सिर्फ वजन नहीं कमर भी नापें

Heart Attack Risk: तोंद निकली है तो बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा, सिर्फ वजन नहीं कमर भी नापें

नई दिल्ली, 26 जुलाई। वजन सामान्य होने के बावजूद अगर पेट बाहर निकला हुआ है तो इसे नजरअंदाज करना स्वास्थ्य के लिए भारी पड़ सकता है। एक नई रिसर्च में सामने आया है कि स्लीप एपनिया और पहले से हृदय रोग से जूझ रहे लोगों में भविष्य के गंभीर हृदय संबंधी खतरों का आकलन केवल बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई से करने के बजाय कमर और लंबाई के अनुपात को देखना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की पत्रिका ‘न्यूरोलॉजी’ में प्रकाशित अध्ययन में 2,662 मरीजों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने इन मरीजों का औसतन 3.7 वर्ष तक अध्ययन किया। रिसर्च में बीएमआई और कमर-लंबाई अनुपात के आधार पर मरीजों में मोटापे के स्तर का आकलन किया गया।

अध्ययन में पाया गया कि बीएमआई के आधार पर केवल 31.8 प्रतिशत मरीज मोटापे की श्रेणी में आते थे, जबकि कमर-लंबाई अनुपात के आधार पर 95.6 प्रतिशत मरीजों में पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी यानी केंद्रीय मोटापा पाया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार यह अंतर बताता है कि सिर्फ शरीर के कुल वजन को देखकर स्वास्थ्य जोखिम का आकलन करना पर्याप्त नहीं हो सकता।

रिसर्च में जिन मरीजों का कमर-लंबाई अनुपात सबसे अधिक था, उनमें दोबारा गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं का खतरा 52 प्रतिशत अधिक पाया गया। वहीं हार्ट अटैक का जोखिम 2.3 गुना तक अधिक था। इसके विपरीत बीएमआई के आधार पर हृदय संबंधी घटनाओं के साथ ऐसा स्पष्ट संबंध नहीं मिला।

शोधकर्ताओं के अनुसार कमर के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी शरीर में अंदरूनी यानी विसरल फैट का संकेत हो सकती है। यह चर्बी हृदय और रक्त वाहिकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए सामान्य वजन वाले लोगों में भी अगर कमर का घेरा लगातार बढ़ रहा है तो इसे स्वास्थ्य के लिए चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।

अध्ययन में यह भी देखा गया कि सीपीएपी थेरेपी का प्रभाव मोटापे के स्तर के आधार पर अलग नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि स्लीप एपनिया और हृदय रोग से जूझ रहे मरीजों की जांच में बीएमआई के साथ कमर-लंबाई अनुपात को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

समय रहते बढ़ती कमर और पेट की चर्बी की पहचान होने पर जीवनशैली में सुधार, नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान और चिकित्सकीय सलाह के जरिए हृदय संबंधी गंभीर जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत हार्ट अटैक जोखिम का आकलन केवल कमर-लंबाई अनुपात से नहीं किया जा सकता और इसके लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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