Fake Signature Controversy: फर्जी हस्ताक्षर विवाद से TMC में मचा सियासी बवाल, दो विधायक निष्कासित, अभिषेक बनर्जी तक पहुंची जांच

Fake Signature Controversy: फर्जी हस्ताक्षर विवाद से TMC में मचा सियासी बवाल, दो विधायक निष्कासित, अभिषेक बनर्जी तक पहुंची जांच
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदरूनी संकट में बदलता दिखाई दे रहा है। पार्टी ने अपने दो विधायकों संदीपन साहा और रितब्रत बनर्जी को निष्कासित कर दिया है। दोनों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और नेतृत्व के निर्देशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है।
मामला उस समय और ज्यादा गरमा गया जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुलासा किया कि दोनों विधायकों ने विधानसभा में कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई और मामला पुलिस जांच तक पहुंच गया।
दरअसल यह पूरा विवाद उस समर्थन पत्र को लेकर शुरू हुआ जिसे टीएमसी ने विधानसभा सचिवालय को सौंपा था। इस पत्र में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के समर्थन में करीब 70 विधायकों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया था। लेकिन जांच के दौरान कुछ हस्ताक्षरों को संदिग्ध पाया गया। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने कोलकाता के हरे स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज कराई और मामला जांच एजेंसियों तक पहुंच गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक टीएमसी ने पहली बार 6 मई को नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़ा पत्र विधानसभा को भेजा था, लेकिन उसे यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि वह आधिकारिक तौर पर टीएमसी विधायक दल की ओर से नहीं भेजा गया था। इसके बाद 19 मई को दूसरा पत्र भेजा गया, जिसमें कई विधायकों के हस्ताक्षर शामिल थे। जांच के दौरान कुछ हस्ताक्षर विधानसभा रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए और यहीं से विवाद शुरू हो गया।
सबसे ज्यादा सवाल टीएमसी नेता नैना बनर्जी के हस्ताक्षरों को लेकर उठे। विधानसभा सचिवालय की शिकायत के अनुसार शपथ ग्रहण के समय किए गए उनके हस्ताक्षर और समर्थन पत्र में मौजूद हस्ताक्षरों में अंतर पाया गया। इसके बाद सीआईडी ने मामले की जांच शुरू की और कई नेताओं से पूछताछ की। जांच के दायरे में नैना बनर्जी, चंद्रनाथ सिन्हा, कुनाल घोष और बहरुल इस्लाम जैसे नेता भी आए हैं।
टीएमसी प्रवक्ता कुनाल घोष ने कहा कि जिन विधायकों को किसी बात की शिकायत थी, उन्हें पहले पार्टी नेतृत्व से संपर्क करना चाहिए था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से शिकायत दर्ज कराने को अनुशासनहीनता बताया। पार्टी ने संदीपन साहा और रितब्रत बनर्जी को निष्कासित कर यह संकेत देने की कोशिश की है कि नेतृत्व के खिलाफ जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
मामले की जांच अब टीएमसी के बड़े नेताओं तक पहुंचती नजर आ रही है। सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को भी पूछताछ के लिए बुलाया था। हालांकि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पेश होने में असमर्थता जताई। सूत्रों के मुताबिक वह फिलहाल घर पर इलाज करवा रहे हैं। इसके बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
इस विवाद का असर विधानसभा की कार्यवाही पर भी दिखाई दे रहा है। नेता प्रतिपक्ष के लिए अब तक कक्ष आवंटित नहीं किया गया है। इसे लेकर टीएमसी विधायकों ने विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष जानबूझकर राजनीतिक विवाद पैदा कर रहा है, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का मामला बता रहा है।





