NFHS-6 : घरेलू फैसलों में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, परिवार नियोजन का बोझ अब भी महिलाओं के कंधों पर

NFHS-6 : घरेलू फैसलों में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, परिवार नियोजन का बोझ अब भी महिलाओं के कंधों पर
नई दिल्ली, 31 मई। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6, 2023-24) की ताजा रिपोर्ट ने देश में महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण और सामाजिक भागीदारी की सकारात्मक तस्वीर पेश की है। सर्वेक्षण के अनुसार अब देश की 89 प्रतिशत विवाहित महिलाएं अपने स्वास्थ्य, घर की बड़ी खरीदारी और रिश्तेदारों के यहां आने-जाने जैसे महत्वपूर्ण घरेलू निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि परिवार नियोजन की जिम्मेदारी का अधिकांश बोझ आज भी महिलाओं पर ही है और पुरुषों की भागीदारी बेहद सीमित बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की विवाहित महिलाओं की घरेलू निर्णयों में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा 84 प्रतिशत था, जो 2019-21 में बढ़कर 88.7 प्रतिशत हुआ और अब 2023-24 में 89 प्रतिशत तक पहुंच गया है। शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की निर्णयात्मक भागीदारी 91.4 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 88 प्रतिशत रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, जागरूकता और वित्तीय समावेशन ने महिलाओं की निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। स्वयं संचालित बैंक या बचत खाता रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर 89 प्रतिशत हो गया है, जबकि पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 78.6 प्रतिशत था। बैंकिंग सुविधाओं तक बढ़ती पहुंच महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। हालांकि रोजगार के क्षेत्र में तस्वीर अभी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। सर्वेक्षण के अनुसार पिछले 12 महीनों में काम करके नकद भुगतान प्राप्त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत केवल 30.8 रहा, जो बताता है कि आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए अभी और प्रयासों की आवश्यकता है।
परिवार नियोजन के आंकड़ों ने लैंगिक असमानता की एक गंभीर तस्वीर भी सामने रखी है। देश में 69.1 प्रतिशत विवाहित महिलाएं किसी न किसी परिवार नियोजन पद्धति का उपयोग कर रही हैं। इनमें महिला नसबंदी का प्रतिशत 36.5 है, जबकि पुरुष नसबंदी मात्र 0.5 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि परिवार नियोजन संबंधी जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा अब भी महिलाओं द्वारा ही निभाया जा रहा है और पुरुषों की भागीदारी बेहद कम है।
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि परिवार नियोजन सेवाओं तक पहुंच में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 8.5 प्रतिशत विवाहित महिलाओं की परिवार नियोजन संबंधी आवश्यकताएं अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 9.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 7 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में महिलाएं गर्भधारण को टालना या बच्चों की संख्या सीमित रखना चाहती हैं, लेकिन उन्हें आवश्यक गर्भनिरोधक साधन, परामर्श या स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं के निर्णय लेने की क्षमता और वित्तीय समावेशन में हुई प्रगति निश्चित रूप से उत्साहजनक है, लेकिन परिवार नियोजन, रोजगार और आर्थिक अवसरों में समान भागीदारी सुनिश्चित किए बिना पूर्ण महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। एनएफएचएस-6 के निष्कर्ष इस दिशा में आगे की नीतियों और कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करते हैं।





