NEET paper leak: परीक्षा घोटालों के विरोध में भारतीय किसान यूनियन मंच का प्रदर्शन, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
NEET paper leak: परीक्षा घोटालों के विरोध में भारतीय किसान यूनियन मंच का प्रदर्शन, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
देशभर में परीक्षा संबंधी धांधली, नीट परीक्षा पेपर लीक, उत्तर प्रदेश में एसएससी परीक्षा निरस्त होने और सीबीएसई कॉपी जांच में सामने आ रही अनियमितताओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन मंच ने नोएडा कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए परीक्षा घोटालों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल त्यागी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें निराशा और संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
महासचिव मनविंद्र भाटी ने कहा कि नीट परीक्षा पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ा है। उन्होंने कहा कि कई युवा मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हुए, जो बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने सरकार से परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की मांग की।
भारतीय किसान यूनियन मंच ने मांग की कि यदि नीट परीक्षा दोबारा आयोजित की जाती है तो छात्रों को परीक्षा केंद्र तक निशुल्क पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उनके ठहरने और खाने-पीने की समुचित व्यवस्था भी सरकार की ओर से की जाए, ताकि दूर-दराज से आने वाले छात्रों और उनके परिवारों को परेशानी न उठानी पड़े।
संगठन ने सीबीएसई कॉपी चेकिंग में सामने आ रही कथित अनियमितताओं पर भी चिंता जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि छात्रों के भविष्य के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।
प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन मंच ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की। संगठन का कहना है कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटाले शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाते हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
प्रदर्शन के बाद संगठन के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा और चेतावनी दी कि यदि छात्रों के हितों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।