
बैठक में पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। यह परियोजना बजट 2026-27 में की गई उस घोषणा का हिस्सा है, जिसमें पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को ऊर्जा दक्ष स्मार्ट एलईडी प्रणाली में बदलने की बात कही गई थी। वर्तमान में पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर करीब 45 हजार पुरानी एचपीएसवी लाइटें और 51 हजार एचपीएसवी एलईडी लाइटें लगी हुई हैं। कुल मिलाकर लगभग 96 हजार लाइटें और 51,160 पोल इस नेटवर्क का हिस्सा हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में कई समस्याएं सामने आ रही थीं। स्ट्रीट लाइटों की वास्तविक समय में निगरानी की सुविधा नहीं होने के कारण खराब लाइटों की जानकारी शिकायत मिलने के बाद ही मिल पाती थी, जिससे कई इलाकों में लंबे समय तक डार्क स्पॉट बने रहते थे। पर्याप्त रोशनी नहीं होने से सड़क सुरक्षा और महिलाओं की सुरक्षा प्रभावित होती थी। इसके अलावा अलग-अलग प्रकार की लाइटों के कारण प्रकाश की गुणवत्ता में असमानता, अधिक बिजली खपत और प्रकाश प्रदूषण जैसी समस्याएं भी सामने आ रही थीं।
नई स्मार्ट एलईडी प्रणाली इन समस्याओं का व्यापक समाधान देगी। परियोजना के तहत सभी पुरानी एचपीएसवी और एलईडी लाइटों को स्मार्ट एलईडी में बदला जाएगा। साथ ही भविष्य की जरूरतों और छूटे हुए स्थानों को ध्यान में रखते हुए 5 हजार अतिरिक्त पोल लगाने का भी प्रावधान किया गया है।
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता केंद्रीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (सीसीसी) होगी, जिसके जरिए हर स्ट्रीट लाइट की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी। किसी भी लाइट के खराब होने की जानकारी तुरंत मिल जाएगी और उसे दूर से नियंत्रित भी किया जा सकेगा। जरूरत के अनुसार रोशनी की तीव्रता को 90 प्रतिशत तक कम या ज्यादा करने की सुविधा भी इस प्रणाली में होगी, जिससे बिजली की बचत और बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एलईडी प्रणाली लागू होने के बाद हर वर्ष लगभग 25 करोड़ रुपये की बिजली बचत होगी। अगले पांच वर्षों में वर्तमान व्यवस्था की तुलना में बिजली खर्च में भारी कमी आएगी। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से दिल्ली की सड़कें डार्क स्पॉट मुक्त होंगी, महिलाओं की सुरक्षा मजबूत होगी, सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और राजधानी को आधुनिक, सुरक्षित तथा ऊर्जा दक्ष प्रकाश व्यवस्था मिलेगी।
बैठक के दौरान पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सुझाव दिया कि इस महत्वपूर्ण योजना का विशेष नामकरण भी किया जाए, जिस पर मुख्यमंत्री ने सहमति जताई।


