
नीति के तहत शहर के बाहरी और परिधीय क्षेत्रों में शहरी समेकन एवं लॉजिस्टिक्स वितरण केंद्र विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर बड़े स्तर पर आने वाले माल को एकत्र कर आवश्यकता के अनुसार शहर के भीतर भेजा जाएगा। इसके साथ ही बाजार स्तर के गोदाम और सूक्ष्म पूर्ति केंद्र भी बनाए जाएंगे, जिससे अंतिम चरण तक सामान की डिलीवरी अधिक तेज और व्यवस्थित हो सकेगी।
सरकार अंतर्देशीय कंटेनर डिपो का आधुनिकीकरण करेगी तथा लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, ट्रक टर्मिनल और पार्किंग हब विकसित किए जाएंगे। मंडियों के पास कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए जाने की योजना है, जिससे भंडारण और परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी और शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव कम किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति में पर्यावरण संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा और अंतिम चरण तक सामान पहुंचाने की व्यवस्था को स्वच्छ एवं हरित बनाया जाएगा। सौर ऊर्जा आधारित वेयरहाउसिंग और ऊर्जा दक्ष ढांचे को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) के माध्यम से माल की आवाजाही की वास्तविक समय पर निगरानी और बेहतर प्रबंधन संभव होगा। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से माल ढुलाई और डिलीवरी प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
इस नीति से ई-कॉमर्स, वस्त्र, निर्माण सामग्री, फल एवं सब्जियां तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। बेहतर भंडारण और वितरण व्यवस्था से उद्योगों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। साथ ही तीसरा पक्ष लॉजिस्टिक्स सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में लगभग 61 प्रतिशत वेयरहाउसिंग की मांग ई-कॉमर्स क्षेत्र से आती है, जिसे ध्यान में रखते हुए आधुनिक पूर्ति अवसंरचना में बड़े निवेश को आकर्षित करने की तैयारी की जा रही है।
नीति के लागू होने से वेयरहाउसिंग, परिवहन, लॉजिस्टिक्स पार्क और कोल्ड चेन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा पैकेजिंग, आईटी आधारित सेवाओं और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ेगा। सरकार कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएगी, जिनमें प्रति कर्मचारी 5 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के विकास पर 50 प्रतिशत तक की पूंजी सब्सिडी, अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक प्रदान की जाएगी। इसके अलावा ब्याज सब्सिडी और बिजली शुल्क में राहत देकर लागत कम करने का प्रयास किया जाएगा। सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से निजी निवेश को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
नीति के तहत सिंगल विंडो प्रणाली को मजबूत किया जाएगा ताकि सभी अनुमतियां एक ही मंच पर उपलब्ध हो सकें। वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को 24 घंटे और सातों दिन संचालित करने की सुविधा दी जाएगी तथा लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मास्टर प्लान दिल्ली 2041’ के तहत थोक बाजारों को चरणबद्ध तरीके से शहर के बाहर स्थानांतरित किया जाएगा और लॉजिस्टिक्स हब के लिए भूमि की शीघ्र पहचान एवं आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह नीति दिल्ली के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में व्यापक सुधार लाएगी। इससे आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, उद्योगों को गति मिलेगी, रोजगार बढ़ेगा और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह नीति दिल्ली की लॉजिस्टिक्स दक्षता को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मजबूत करने के साथ राज्यों की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस मापने वाली लीड्स रैंकिंग में सुधार लाने में भी सहायक होगी। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शी प्रक्रियाओं और डिजिटल एकीकरण के माध्यम से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को नई गति मिलेगी, जिससे निवेशकों के लिए दिल्ली अधिक आकर्षक गंतव्य बनेगी।
नीति के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्लानिंग, रियल-टाइम ट्रैकिंग और डिजिटल फ्रेट मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू किए जाएंगे। इससे माल ढुलाई की योजना, रूट ऑप्टिमाइजेशन और डिलीवरी शेड्यूलिंग अधिक सटीक और कुशल बनेगी, जिससे लागत में कमी और समय की बचत होगी।





