INS Taragiri: आत्मनिर्भर भारत की नौसैनिक ताकत को मिला नया आयाम

INS Taragiri: आत्मनिर्भर भारत की नौसैनिक ताकत को मिला नया आयाम
नई दिल्ली/विशाखापत्तनम, 3 अप्रैल : स्वदेशी तकनीक से निर्मित भारत का अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी शुक्रवार को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हो गया। राजनाथ सिंह की मौजूदगी में कमीशन किया गया यह युद्धपोत देश की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और बढ़ती नौसैनिक ताकत का प्रतीक माना जा रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में एक मजबूत और सक्षम नौसेना बेहद जरूरी है, क्योंकि भारत की लगभग 95% व्यापारिक गतिविधियां समुद्री मार्गों से होती हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा सीधे देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय नौसेना न केवल समुद्री मार्गों और चोक प्वाइंट्स की सुरक्षा कर रही है, बल्कि अंडरसी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे इंटरनेट केबल्स की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा रही है। भारत अब वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है और रक्षा निर्यात लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है।
आईएनएस तारागिरी अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिससे इसकी रडार पकड़ बेहद कम हो जाती है। यह लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है और हाई-स्पीड ऑपरेशन में सक्षम है। इसमें आधुनिक रडार, सोनार और ब्रह्मोस मिसाइल जैसी अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां लगी हैं, जो इसे दुश्मन के खिलाफ त्वरित और सटीक कार्रवाई में सक्षम बनाती हैं।
करीब 6,670 टन वजनी यह फ्रिगेट प्रोजेक्ट 17ए के तहत तैयार चौथा युद्धपोत है, जिसे 75% से अधिक स्वदेशी तकनीक के साथ बनाया गया है। इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया, जबकि निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है।
यह युद्धपोत युद्ध संचालन, समुद्री सुरक्षा, एंटी-पायरेसी, तटीय निगरानी और मानवीय सहायता मिशनों में समान रूप से प्रभावी है। आईएनएस तारागिरी का नौसेना में शामिल होना भारत के आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण और समुद्री शक्ति को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




