Dry Eye Syndrome Alert: ज्यादा स्क्रीन टाइम से आंखों की नमी कम, बढ़ रहा खतरा

Dry Eye Syndrome Alert: ज्यादा स्क्रीन टाइम से आंखों की नमी कम, बढ़ रहा खतरा
डिजिटल युग में कंप्यूटर, मोबाइल और टीवी स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल आंखों के लिए खतरा बनता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक स्क्रीन देखने से Dry Eye Syndrome की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसमें आंखों में नमी की कमी हो जाती है और जलन, खुजली व धुंधली दृष्टि जैसी परेशानियां होने लगती हैं।
नई दिल्ली स्थित AIIMS Delhi के आरपी सेंटर की नेत्र विशेषज्ञ प्रोफेसर नम्रता शर्मा के अनुसार, लगातार स्क्रीन देखने से पलकें कम झपकती हैं, जिससे आंखों की प्राकृतिक नमी तेजी से घट जाती है। यही कारण है कि आज के समय में यह समस्या युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है।
आंकड़ों के अनुसार, देश में ड्राई आई सिंड्रोम के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2010 में जहां यह समस्या करीब 29.25% लोगों में पाई जाती थी, वहीं 2016 में यह बढ़कर 46.71% हो गई और अब लगभग 54.3% आबादी को प्रभावित कर रही है। खासतौर पर 21 से 40 वर्ष के युवाओं में इसके मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं।
इस समस्या के प्रमुख लक्षणों में आंखों में जलन, चुभन, सूखापन, रेत जैसा महसूस होना, आंखों से पानी आना और धुंधली दृष्टि शामिल हैं। कई बार आंखों में लालिमा भी देखने को मिलती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह बीमारी छुआछूत की नहीं है, बल्कि जीवनशैली और पर्यावरण से जुड़ी समस्या है।
ड्राई आई सिंड्रोम के मुख्य कारणों में अत्यधिक स्क्रीन टाइम, एयर कंडीशनर या सूखी हवा में लंबे समय तक रहना, बढ़ती उम्र, मधुमेह और थायराइड जैसी बीमारियां, तथा लंबे समय तक कॉन्टैक्ट लेंस पहनना शामिल हैं। खासकर आईटी सेक्टर में काम करने वाले, देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने वाले और 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग इसके ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
हालांकि इस बीमारी का स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवाएं और आई ड्रॉप्स उपयोगी साबित हो रही हैं। साथ ही, एम्स सहित कई संस्थानों में इसके बेहतर इलाज के लिए क्लीनिकल ट्रायल भी जारी हैं, जिससे भविष्य में प्रभावी उपचार मिलने की उम्मीद है।
बचाव के लिए डॉक्टर 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं, यानी हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखना चाहिए। इसके अलावा बार-बार पलकें झपकाना, आंखों को तेज हवा से बचाना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आंखों में जलन, सूखापन या धुंधलापन लंबे समय तक बना रहे तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए, ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके और गंभीर समस्याओं से बचा जा सके।
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