Saturday, 24 October 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Ayodhya : योगी सरकार के मार्गदर्शन में अयोध्या में जगमगाएंगे 30 लाख से अधिक दीप, नया कीर्तिमान रचने की तैयारीAyodhya : दीपोत्सव-2026 से पहले निखरेगी रामनगरी की भव्यता, प्रमुख मार्गों के सौंदर्यीकरण में जुटा लोक निर्माण विभागLucknow : 26 अक्टूबर को धूमधाम से महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाएगी योगी सरकारMathura : वृंदावन में गंगा नृत्य नाटिका के साथ ब्रजरज उत्सव की सांस्कृतिक गतिविधियों का शुभारंभNew Delhi : दिल्ली क्वीन ब्यूटी पेजेंट 2026 का आयोजन, मुस्कान सेन बनीं विजेताChandigarh : दिल्ली एयरपोर्ट के अधिकारियों ने ऊपर से दबाव का हवाला देकर मुझे 2 घंटे तक रोककर रखा- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मानChandigarh : वोट-चोरी’ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा; एसआईआर को तुरंत रद्द किया जाए- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मानTiger Shroff Firing Case: सलमान खान और रणबीर कपूर के घरों की रेकी का दावा, टाइगर पर फायरिंग के बाद बॉलीवुड की सुरक्षा बढ़ाने की मांग

Kidney Disease Risk: शुगर, बीपी और मोटापा बन रहे किडनी के बड़े दुश्मन

Kidney Disease Risk: शुगर, बीपी और मोटापा बन रहे किडनी के बड़े दुश्मन

नई दिल्ली में विश्व किडनी दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और बढ़ता मोटापा देश में किडनी से जुड़ी बीमारियों को तेजी से बढ़ा रहे हैं। एम्स दिल्ली के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. दीपांकर भौमिक के अनुसार भारत की लगभग 11 से 15 प्रतिशत आबादी यानी करीब 14 से 21 करोड़ लोग क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों के कारण किडनी रोग अब तेजी से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।

डॉ. भौमिक ने बताया कि क्रोनिक किडनी डिजीज एक प्रगतिशील बीमारी है, जो धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता को कम करती जाती है और गंभीर स्थिति में ‘एंड स्टेज किडनी डिजीज’ तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज को जीवित रहने के लिए नियमित डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ती है, जो काफी महंगा और जटिल उपचार होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में किडनी से जुड़ी बीमारियां मृत्यु के कारणों में आठवें स्थान पर पहुंच चुकी हैं, जो चिंता का विषय है।

विशेषज्ञों के अनुसार किडनी को स्वस्थ रखने के लिए कुछ सरल लेकिन महत्वपूर्ण उपाय अपनाए जा सकते हैं। इनमें पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नमक, चीनी और वसा का सीमित सेवन करना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और स्वस्थ वजन बनाए रखना शामिल है। इसके अलावा बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक उपयोग करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।

डॉ. भौमिक ने यह भी सलाह दी कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या अन्य दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित लोगों को अपनी किडनी की नियमित जांच करानी चाहिए। उनके अनुसार जोखिम वाले मरीजों को साल में कम से कम एक या दो बार किडनी की जांच करानी चाहिए। इसके लिए खून में क्रिएटिनिन की जांच और मूत्र में प्रोटीन की जांच जैसे साधारण टेस्ट काफी प्रभावी माने जाते हैं, जिनसे समय रहते बीमारी का पता लगाया जा सकता है।

हाल ही में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के एक अध्ययन में यह भी सामने आया है कि देश की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी यानी करीब 56 करोड़ लोग ‘मेटाबॉलिकली ओबेस’ हैं। इसका मतलब है कि वे देखने में सामान्य या दुबले लग सकते हैं, लेकिन उनके शरीर में वसा का स्तर अधिक होता है। इस स्थिति को ‘थिन-फैट इंडियन’ की अवधारणा से जोड़ा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ रही है और फिलहाल देश की लगभग एक-चौथाई आबादी यानी करीब 35 करोड़ लोग ही वास्तव में मेटाबॉलिक रूप से स्वस्थ माने जाते हैं।

इस वर्ष विश्व किडनी दिवस की थीम ‘सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य – लोगों की देखभाल और पृथ्वी की सुरक्षा’ रखी गई है। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि किडनी से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम और उपचार हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि वे पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हों और संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करें।

इसी दिशा में अब ‘ग्रीन नेफ्रोलॉजी’ या ‘ग्रीन डायलिसिस’ की अवधारणा पर भी जोर दिया जा रहा है। इसमें डायलिसिस प्रक्रिया के दौरान पानी और ऊर्जा की खपत को कम करने वाली तकनीकों का इस्तेमाल, प्लास्टिक और अन्य मेडिकल कचरे को कम करना, उनके सुरक्षित निपटान की व्यवस्था करना और अस्पतालों में पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

‘कोटा फैक्ट्री’ सीजन 3: जितेंद्र कुमार की दमदार ड्रामा नेटफ्लिक्स पर आएगी, रिलीज डेट सामने आई

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Tirthankar Sarkar

संबंधित खबरें