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Indian Food Atlas: सदियों पुराने भारतीय व्यंजनों को सहेजेगा नया फूड एटलस

Indian Food Atlas: सदियों पुराने भारतीय व्यंजनों को सहेजेगा नया फूड एटलस

Noida में स्थित National Council for Hotel Management and Catering Technology को देश का एक विशेष फूड एटलस तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह परियोजना Ministry of Tourism India के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य भारत के पारंपरिक और धीरे-धीरे खत्म हो रहे व्यंजनों को संरक्षित करना है।

इस फूड एटलस में केवल राज्यों की भौगोलिक जानकारी ही नहीं, बल्कि देश के सदियों पुराने पारंपरिक भोजन और उनकी रेसिपी से जुड़ी जानकारी भी शामिल की जाएगी। इसका मकसद भारतीय खाने की विरासत को बचाना और नई पीढ़ी को पुराने पारंपरिक व्यंजनों से दोबारा जोड़ना है।

Indian Culinary Institute के एक प्रोफेसर और शेफ Chef Mohit ने लगभग दो साल की मेहनत के बाद जम्मू से कन्याकुमारी तक के क्षेत्रों से करीब 150 ऐसे पारंपरिक व्यंजन खोजे हैं जो अब लगभग खत्म हो चुके हैं। इन व्यंजनों में कश्मीरी अचार, राजस्थानी मूली का हलवा और गुजराती पोडमा जैसी डिश शामिल हैं।

इस परियोजना के तहत देशभर के 19 सरकारी Institute of Hotel Management भी अपने-अपने क्षेत्रों के पारंपरिक और लुप्त हो रहे व्यंजनों पर रिसर्च कर रहे हैं। इसके लिए प्रोफेसर और छात्र पुराने शाही परिवारों के सदस्यों, स्थानीय बुजुर्गों और पारंपरिक शेफ से मिलकर व्यंजनों की खासियत, बनाने की विधि और इस्तेमाल होने वाले मसालों की जानकारी जुटा रहे हैं।

Priyadarshan Lekhawat ने बताया कि फूड एटलस तैयार होने के बाद स्कूल और कॉलेज के छात्र भी भारतीय पारंपरिक भोजन के बारे में विस्तार से जान सकेंगे। इसमें सदियों पुराने व्यंजनों के स्वास्थ्य लाभ और आयुर्वेदिक चिकित्सा में उनके उपयोग के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

यह पहल भारतीय खानपान की समृद्ध परंपरा को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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